Friday, February 8, 2019

The Rose

आज रोज डे है लेकिन गुलाब का मौसम तो पूरे बसंत रहता है या यूं कहिए पूरे साल। विज्ञान कहता है कि गुलाब की सुगंध में कुछ ऐसा है जो हमारे मूड को खुशमिजाज बनाता है। जरूर होता होगा जी वरना ऐसे ही गुलाब ने पूरी दुनिया में अपना खास मुकाम नहीं बनाया है। कहते हैं बीमार को सुगंधित गुलाब देना चाहिए और कोई रूठ जाए तो मनाने का आधा काम गुलाब ही कर देता है। लेकिन गुलाब का फूल सबसे अधिक वहां काम आता है जहां प्यार के इजहार की बात हो। सिर्फ एक गुलाब पेश कीजिए प्रेम की खुश्बू प्रेमिका के कानों तक न पहुंचे, मुमकिन नहीं। आज कल तो विरोध जताने के लिए भी लोग गुलाब पर ही भरोसा करने लगे हैं।

दरअसल, गुलाब सिर्फ सुगंधित फूल भर नहीं, जीने का सलीका भी है। वह गमले में भी खिल जाता है क्यारी में भी मगर उसकी मुस्कान और महक हर जगह कालजयी है। वह कभी नहीं मरती। तभी तो रामवृक्ष बेनीपुरी लिखते हैं-‘‘मानव को मानव बनाया गुलाब ने! मानव मानव तब बना जब उसने शरीर की आवश्यकताओं पर मानसिक वृत्तियों को तरजीह दी।’’

मानव ने जब गुलाब को जाना तभी उसने सौंदर्य को पहचाना। और यहीं से शुरू हुई होगी कला और जीवन में सौंदर्य की तलाश। वही कला जिसने हमें सभ्य बनाया, उंचा उठाया और बेहतरी की ओर निरंतर प्रयासरत होने का मार्ग सुझाया।

गुलाब हमारी मानसिक वृत्तियों का प्रतीक है। विनम्रता, अनुरोध, प्रेम सबका संबंध कहीं न कहीं गुलाब से है और आज के हिंसाग्रस्त दुनिया में गुलाब की अहमियत और बढ़ जाती है। गुलाब एक कोमल विचार है जिसे अपनाकर समाज, देश और अंत में पृथ्वी को बचाया जा सकता है। जिस दिन गुलाब पूरी दुनिया में राज करने लगेगा उस दिन हर जगह शांति होगी, मनुष्यता होगी। लेकिन जब तक गुलाब को एक फूल मानकर उसे गुलदस्तों में सजाते रहेंगे हिंसा जारी रहेगी और रोज डे आते-जाते रहेंगे।

-सरस्वती रमेश

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