Monday, February 13, 2017

जूलिया

कई दिनों बाद गुनगुनी धूप निकली थी। मैं आराम कुर्सी पर आँगन में बैठ अन्याय के विरोध में लिखी गई चेखव की एक प्रसिद्द कहानी का हिन्दी अनुवाद पढ़ रहा था कि तभी डाकिए ने दरवाज़े पर आवाज़ देते हुए पिछले महीने का मोबाइल का बिल मेरी तरफ़ उछाल दिया। हवा में ही बिल को लपक कर मैंने लिफ़ाफ़ा खोला। अब एक हाथ में कहानी थी और दूसरे में बिल चेखव ने लिखा 'एक दिन मालिक ने अपने बच्चों की गवर्नेस जूलिया को अपने पढ़ने के कमरे में बुलाकर उसका हिसाब करना चाहा। उसने जूलियासे पूछा - हाँ, तो तुम्हारी तनख्वाह तीस रुबल महीना तय हुई थी ना?

- जी नहीं, चालीस रुबल महीना। जूलिया ने दबे स्वर में कहा।- नहीं भाई तीस। मैं बच्चों की गवर्नेस को हमेशा तीस रुबल महीना ही देता आया हूँ।'

अब मैंने एक निगाह दूसरे हाथ में पकड़े बिल पर डाली। बिल ने कहा - आपके पोस्टपेड कनेक्शन का प्लान है ग्यारह सौ निन्यानवे रुपए प्रति माह। हालांकि मैंने कनेक्शन महीने की चौथी तारीख से लिया था पर मैं चुप रहा। बिल ने आगे कहा - प्लान के अनुसार आपके पास बारह सौ फ्री मिनट थे, जिनको आपने चौबीस तारीख़ तक इस्तेमाल कर लिया था। - पर फ्री मिनट्स ख़त्म होने पर मुझे कोई सूचना नहीं दी गईमैंने प्रतिरोध किया
- इसके बाद आपके द्वारा की गई अड़तीस कॉल्स में कुल दो सौ छप्पन मिनट बात हुई और इसका बिल सवा रुपए प्रति मिनट के हिसाब से बना तीन सौ बीस रुपए। इस तरह हुए पंद्रह सौ उन्नीस रुपए - लेकिन….... - आपने सारे नियम शर्तें पढ़ रखे हैं, यह आपके हस्ताक्षर कहते हैं
चेखव की कहानी में '- अच्छा, तो तुम्हें यहाँ काम करते हुए कितने दिन हुए, दो महीने ही ना?- जी नहीं, दो महीने पाँच दिन।
- अरे नहीं, ठीक दो महीने हुए हैं। मैंने डायरी में सब नोट कर रखा है। तो दो महीने के बनते हैं साठ रुबल। लेकिन तुमने हर इतवार को छुट्टी मनाई है। इतवार-इतवार तुमने काम नहीं किया, कोल्या को सिर्फ घुमाने ले गई हो।'
उधर बिल बोले जा रहा था - आप महीने में छह बार दूसरे ज़ोन में गए, जिसका रोमिंग इनकमिंग-आउटगोइंग कॉल्स का बना एक सौ छ्यानवे रूपए - ऐसा कब तक चलेगा! अपने ही देश-प्रदेश के दूसरे हिस्सों में रोमिंग?मैं हैरान था मगर बिल मेरी तरफ देखे बिना बताए जा रहा था - अब हुए सत्रह सौ पन्द्रह रुपए
इधर कहानी में '- इसके अलावा तुमने तीन छुट्टियाँ और ली हैं। जूलिया का चेहरा पीला पड़ गया। वह बार-बार अपने ड्रेस की सिकुड़नें दूर करने लगी। बोली एक शब्द भी नहीं।
- हाँ तो नौ इतवार और तीन छुट्टियाँ यानी बारह दिन काम नहीं हुआ। मतलब यह कि तुम्हारे बारह रुबल कट गए। उधर कोल्या चार दिन बीमार रहा और तुमने सिर्फ तान्या को ही पढ़ाया। पिछले सप्ताह शायद तीन दिन हमारे दाँतों में दर्द रहा था और मेरी बीबी ने तुम्हें दोपहर बाद छुट्टी दे दी थी। तो इस तरह तुम्हारे कितने नागे हो गए? बारह और सात उन्नीस। तुम्हारा हिसाब कितना बन रहा है? इकतालीस। इकतालीस रुबल। ठीक है न ?'

बिल में - आपको दिए गए पाँच सौ फ्री मैसेजेस में से आपने सिर्फ बत्तीस प्रयोग किए - हम्म मैंने राहत की साँस ली - मगर पचास रुपए कॉलर्स टोन के हुए और अब हुए सत्रह सौ पैंसठ रुपए - अरे! मैंने तो कोई कॉलर्स टोन शुरू कराई ही नहीं, ये अपने आप कैसे? मेरे लिए मामला बर्दाश्त के बाहर होता जा रहा था
'दूसरी तरफ जूलिया की आँखों में आँसू छलछला आए। वह धीरे से खाँसी। उसके बाद अपनी नाक पोंछी, लेकिन उसके मुँह से एक भी शब्द नहीं निकला। मालिक कहता रहा
- हाँ एक बात तो मैं भूल गया था उसने डायरी पर नजर डालते हुए कहा - पहली जनवरी को तुमने चाय की प्लेट और प्याली तोड़ डाली थी। चलो, मैं उसके दो रुबल ही काटूँगा। इसके अतिरिक्त एक दिन तुम्हारे ध्यान न देने से कोल्या पेड़ पर चढ़ गया और वहाँ उलझकर उसकी जैकेट फट गई। तो दस रुबल उसके कट गए। फिर तुम्हारी इसी लापरवाही के कारण हमारी नौकरानी ने तान्या के नए जूते चुरा लिए। तुम अपने काम में ढील दोगी तो पैसे तो काटने ही पड़ेंगे।'
उधर बिल ने आगे बताया - महीने की तेरह तारीख को आपने इंटरनेट का प्रयोग किया लेकिन उसके लिए आपने हमारा विशेष इंटरनेट पैक नहीं लिया हुआ था, इंटरनेट का हुआ तैंतालीस रुपए पैंतीस पैसे और कुल हुए अठारह सौ आठ रुपए पैंतीस पैसे अब तक मैं भी जूलिया में ढलने लगा था।
चेखव की कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई थी'जूलिया के मालिक ने कहा - तो जूतों के पाँच रुबल और कट गए और हाँ, दस जनवरी को मैंने तुम्हें दस रुबल दिए थे।
- जी, मुझे अभी तक एक ही बार कुछ पैसे मिले थे और वे भी आपकी पत्नी ने दिए थे। सिर्फ तीन रुबल। ज्यादा नहीं।- अच्छा! हाँ तो चौदह में से तीन और घटा दो। इस तरह तुम्हारे बचते हैं ग्यारह रुबल। ये रही तुम्हारी तनख्‍वाह, पूरे ग्यारह रुबल। देख लो, ठीक हैं न?जूलिया ने काँपते हाथों से ग्यारह रुबल ले लिए और धीरे से विनीत

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