Thursday, October 1, 2015

खुश रहना सीखो

एक दिन क्लास में कोई शिक्षिका नहीं थी, तब रोहन ने अपने पास वाले लड़के की किताब उठाई और फाड़ डाली। उस लड़के ने ऐसा करने पर रोहन को एक थप्पड़ मार दिया। रोहन गुस्से से पागल हो गया। उसने कुछ नहीं सोचा और कुर्सी उठाई और उसकी कमर में जोर से मार डाली उसकी रीड की हड्डी टूट गई। स्कूल से उसे निकाल दिया। कोई भी स्कूल उसे अपने यहाँ पर पढाने को तैयार था।
एक दिन रोहन के पापा ने उसे अपने पास बुलाया और कुछ आलू देते हुए उससे कहा कि, इन आलुओ में से उतने आलू उठाओ जितने लोगो से तुम नफरत करते हो। रोहन को कुछ समझ नहीं आया कि उसके पापा ऐसा क्यों बोल रहे है, परन्तु फिर भी उसने उनके कहने से 9 आलू उठा लिए क्यूंकि वह 9 लोगो से बहुत नफरत करता था। उसके पापा ने कहा जब भी कही तुम जाओ ये आलू अपने साथ रखना और अगर तुम्हे और लोगो पर भी गुस्सा आने लगे तो तुम उतने ही आलू और रख लेना।
पापा के कहने पर रोहन ने ऐसे ही किया। वह जहाँ भी जाता उन आलुओ को अपने साथ ले जाता। आलू में बहुत अधिक बजन था, आलू बहुत अधिक थे। रोहन को अपने पापा पर गुस्सा आ रहा था, परन्तु स्कूल से निकाल देने के बाद वह उनसे कुछ बोल भी नहीं सकता था। दो तीन दिन में ही आलू सड़ने लगे और उनसे गन्दी बदबू आने लगी। अब रोहन उनको अपने पास नहीं रख पा रहा था। वह अपने पापा के पास गया और बोल दिया कि, मै इन आलुओ को अब नहीं रख पाउगा। पहले तो इनमे केवल वजन था, परन्तु अब इनसे गन्दी बदबू आने लगी है। इतना कहकर वह चुप हो गया।
रोहन के पिता ने उसे अपने पास बुला कर कहा कि, बेटा जिस तरह सड़े आलुओ की बदबू से हमें सास लेने में परेशानी होती है। उसी प्रकार घृणा और दूसरों के प्रति नफ़रत की भावना भी हमें सुकून से जीने नहीं देती। नफ़रत और घृणा भी सड़े आलुओ के जैसे ही होती है, जो लगातार हमारे मन को दूषित करती है। जब तुम सड़े आलुओ के साथ कुछ दिन रह नहीं पाये, फिर क्या अपने दूषित मन के साथ पूरी ज़िन्दगी रह पाओगे।
दोस्तों नफरत और दूसरों के प्रति गलत विचार सबसे ज्यादा बुरा असर आपके खुद के जीवन पर डालते है। दूसरों के प्रति गलत भावना रखकर आप कभी अपने जीवन में खुश नहीं रह सकते। गुस्सा, नफ़रत और दुसरो के प्रति गलत विचार आपकी ज़िन्दगी को इतना खोकला बना देती है, कि वह केवल अन्दर से ही नहीं बाहर से भी आपको खुद भद्दी लगने लगती है। आपका मन एक ऐसी जगह होती है, जहा जो बोते है वह सबसे ज्यादा पनपता है, चाहे वह ‘प्यार’ हो या किसी के लिए ‘नफरत’।
खुश रहना सीखो और आनंदमय जीवन जीने के लिए दूसरों को माफ़ करना सीखो।

Saturday, September 19, 2015

रोटियाँ

इतनी सारी रोटियाँ
"कितने बडे परिवार में व्याह दिया तुमने माँ , एक बार भी नहीं सोचा कि कैसे निभाऊँगी मै ? "
"नहीं बिट्टो ऐसा नहीं कहते ,भरा - पूरा घर है तुम्हारा । ऐसे परिवार क़िस्मत- वालियों को मिलते है । "
"खाक क़िस्मत -वालियाँ , तुम नहीं जानती कि मुझे , इतनीss सारी रोटियां अकेले सेंकनी पडती है ।"
"घर के लोगों की रोटियां नहीं गिनते बिट्टो , नजर लग जाती है ।" माँ हल्की चपत लगाते हुए कह उठी थी उस दिन ।
माँ का लाड़ से मुस्कुरा कर रह जाना, आज उसे बहुत याद आ रहा था ।
पति की अचानक हुए रोड एक्सीडेंट में उनका मरणासन्न अवस्था और बडे़ परिवार का एकजुटता से बच्चे समेत उसको भी संभालना , आज रसोई पकाते हुए रोटियां गिनती में बहुत कम नजर आ रही थी ।
कान्ता राॅय
भोपाल

प्यार

प्यार
पति को आॅफिस के लिये विदा करके ,सुबह की भाग - दौड़ निपटा पढने को अखबार उठाया , कि डोर बेल बज उठी ।
"इस वक्त कौन हो सकता है !" सोचते हुए दरवाजा खोला। उसे मानों साँप सूँघ गया । पल भर के लिये जैसे पूरी धरती ही हिल गई थी । सामने प्रतीक खड़ा था ।
"यहाँ कैसे ?" खुद को संयत करते हुए बस इतने ही शब्द उसके काँपते हुए होठों पर आकर ठहरे थे ।
"बनारस से हैदराबाद तुमको ढूँढते हुए बामुश्किल पहुँचा हूँ ।" वह बेतरतीब सा हो रहा था । सजीला सा प्रतीक जैसे कहीं खो गया था ।
"आओ अंदर, बैठो ,मै पानी लाती हूँ ।"
"नहीं , मुझे पानी नहीं चाहिए, मै तुम्हें लेने आया हूँ , चलो मेरे साथ । "
"मै कहाँ , मै अब नहीं चल सकती हूँ कहीं भी ।"
"क्यों, तुम तो मुझसे प्यार करती हो ना !"
"प्यार ! शायद दोस्ती के लिहाज़ से करती हूँ ।"
"तुम्हारी शादी जबरदस्ती हुई है ।हमें अलग किया गया है । तुम सिर्फ मुझे प्यार करती हो ।"
"नहीं, तुम गलत सोच रहे हो प्रतीक । मै उस वक्त भी तुमसे अधिक अपने मम्मी - पापा से प्यार करती थी ,इसलिए तो उनके प्यार के आगे तुम्हारे प्यार का वजूद कमजोर पड़ गया । "
"लेकिन जिस इंसान से तुम्हारी शादी हुई उससे प्यार ......"
"बस, अब आगे कुछ ना कहना , वो मेरे पति है और मै सबसे अधिक उन्हीं से प्यार करती हूँ ।उनसे मेरा जन्मों का नाता है । "
"और मै, मै कहाँ हूँ ? "
"तुम दोस्त हो ,तुम परिकथाओं के राजकुमार रहे हो मेरे लिए, जो महज कथाओं तक ही सिमटे रहते है हकीकत से कहीं कोसों दूर ।"
"अच्छा , तो मै अब चलता हूँ । तुमसे एकबार मिलना था सो मिल लिया । " बाहर आकर जेब में हाथ डाल टिकट फाड़ कर वहीं फेंक बिना पलटे वो निकल गया और वह जाते हुए उसे अपलक , उसके ओझल होने तक ,युँ ही ,वहीं ठिठकी निहारती रही ।
कान्ता राॅय
भोपाल

Monday, April 6, 2015

Zindagi ka safar

अपने लिए भी जियें। थोड़ा सा वक्त निकाले..........

ज़िंदगी के 20 वर्ष हवा की तरह उड़ जाते हैं. फिर शुरू होती है नौकरी की खोज .  ये नहीं वो , दूर नहीं पास . ऐसा करते 2-3 नौकरीयां छोड़ते पकड़ते , अंत में एक तय होती है. और ज़िंदगी में थोड़ी स्थिरता की शुरूआत होती है.

और हाथ में आता है पहली तनख्वाह का चेक , वह बैंक में जमा होता है और शुरू होता है अकाउंट में जमा होने वाले कुछ शून्यों का अंतहीन खेल.

इस तरह 2-3 वर्ष निकल जाते हैँ  .  'वो' स्थिर होता है. बैंक में कुछ और शून्य जमा हो जाते हैं. इतने में  आयु पच्चीस वर्ष हो जाते हैं.

विवाह की चर्चा शुरू हो जाती है. एक खुद की या माता पिता की पसंद की लड़की से यथा समय विवाह होता है और ज़िंदगी की राम कहानी शुरू हो जाती है.

शादी के पहले 2-3 साल नर्म , गुलाबी , रसीले और सपनीले गुज़रते हैं .
हाथों में हाथ डालकर बातें और रंग बिरंगे सपने . पर ये दिन जल्दी ही उड़ जाते हैं. और इसी समय शायद बैंक में कुछ शून्य कम होते हैं. क्योंकि थोड़ी मौजमस्ती, घूमनाफिरना , खरीदी होती है.

और फिर धीरे से बच्चे के आने की आहट होती है और वर्ष भर में पालना झूलने लगता है.

सारा ध्यान अब बच्चे पर केंद्रित हो जाता है.  उसका खाना पीना , उठना बैठना , शु शु पाॅटी , उसके खिलौने, कपड़े और उसका लाड़ दुलार.  समय कैसे फटाफट निकल जाता है.

इन सब में कब इसका हाथ उसके हाथ से निकल गया, बातें करना , घूमना फिरना कब बंद हो गया, दोनों को ही पता नहीं चला ?

इसी तरह उसकी सुबह होती गयी   और. बच्चा बड़ा होता गया. .. वो बच्चे में व्यस्त होती गई और ये अपने काम में.  घर की किस्त , गाड़ी की किस्त और बच्चे कि ज़िम्मेदारी . उसकी शिक्षा और भविष्य की सुविधा. और साथ ही बैंक में शून्य  बढ़ाने का टेंशन. उसने पूरी तरह से अपने आप को काम में झोंक दिया. 
बच्चे का स्कूल में एॅडमिशन हुआ और वह बड़ा होने लगा . उसका पूरा समय बच्चे के साथ बीतने लगा.

इतने में वो पैंतीस का हो गया.  खूद का घर , गाड़ी और बैंक में कई सारे शून्य. फिर भी कुछ कमी है, पर वो क्या है समझ में नहीं आता.  इस तरह उसकी चिढ़ चिढ़ बढ़ती जाती है और ये भी उदासीन रहने लगा.

दिन पर दिन बीतते गए , बच्चा बड़ा होता गया और उसका खुद का एक संसार तैयार हो गया. उसकी दसवीं आई और चली गयी. तब तक दोनों ही चालीस के हो गए. बैंक में शून्य बढ़ता ही जा रहा है.

एक नितांत एकांत क्षण में उसे गुज़रे दिन याद आते हैं और वो मौका देखकर उससे कहता है '
अरे ज़रा यहां आओ ,
पास बैठो .
चलो फिर एक बार हाथों में हाथ ले कर बातें करें , कहीं घूम के आएं .... उसने अजीब नज़रों से उसको देखा और कहा " तुम्हें कभी भी कुछ भी सूझता है . मुझे ढेर सा काम पड़ा है और तुम्हें बातों की सूझ रही है " . कमर में पल्लू खोंस कर वो निकल गई .

और फिर आता है पैंतालीसवां साल , आंखों पर चश्मा लग गया .बाल अपना काला रंग छोड़ने लगे,  दिमाग में कुछ उलझनें शुरू ही थीं. . . . . बेटा अब काॅलेज में है. बैंक में शून्य बढ़ रहे हैं. उसने अपना नाम कीर्तन मंडली में डाल दिया और . . . .

बेटे का college खत्म हो गया , अपने पैरों पर खड़ा हो गया.  अब उसके पर फूट गये और वो एक दिन परदेस उड़ गया...

अब उसके बालों का काला रंग और कभी कभी दिमाग भी साथ छोड़ने लगा.... उसे भी चश्मा लग गया था. अब वो उसे उम्र दराज़ लगने लगी क्योंकि वो खुद भी बूढ़ा  हो रहा था.

पचपन  के बाद साठ की ओर बढ़ना शुरू था. बैंक में अब कितने शून्य हो गए, उसे कुछ खबर नहीं है. बाहर आने जाने के कार्यक्रम अपने आप बंद होने लगे ।

गोली -दवाइयों का दिन और समय निश्चित होने लगा . डाॅक्टरों की तारीखें भी तय होने लगीं. बच्चे  बड़े होंगे ये सोचकर लिया गया घर भी अब बोझ लगने लगा. बच्चे कब वापस आएंगे , अब बस यही हाथ रह गया था .

और फिर वो एक दिन आता है. वो सोफे पर लेटा  ठंडी हवा का आनंद ले रहा था . वो शाम की दिया-बाती कर रही थी . वो देख रही थी कि वो सोफे पर लेटा है. इतने में फोन की घंटी बजी , उसने लपक के फोन उठाया . उस तरफ बेटा था. बेटा अपनी शादी की जानकारी देता है और बताता है कि  अब वह परदेस में ही रहेगा. उसने बेटे से बैंक के शून्य के बारे में क्या करना यह पूछा. अब चूंकि विदेश के शून्य की तुलना में उसके शून्य बेटे के लिये शून्य हैं इसलिए उसने पिता को सलाह दी " एक काम करिये , इन पैसों का ट्रस्ट बनाकर वृद्धाश्रम को दे दीजिए और खुद भी वहीं रहीये". कुछ औपचारिक बातें करके बेटे ने फोन रख दिया.

वो पुनः सोफे पर आ कर बैठ गया. उसकी भी दिया बाती खत्म होने आई थी. उसने उसे आवाज़ दी " चलो आज फिर हाथों में हाथ ले के बातें करें "
वो तुरंत बोली " बस अभी आई " उसे विश्वास नहीं हुआ , चेहरा खुशी से चमक उठा , आंखें भर आईं , उसकी आंखों से गिरने लगे और गाल भीग गए .
अचानक आंखों की चमक फीकी हो गई और वो निस्तेज हो गया.

उसने शेष पूजा की और उसके पास आ कर बैठ गई,  कहा " बोलो क्या बोल रहे थे " पर उसने कुछ नहीं कहा . उसने उसके शरीर को छू कर देखा . शरीर बिल्कुल ठंडा पड़ गया था और वो एकटक उसे देख रहा था .

क्षण भर को वो शून्य हो गई,  क्या करूं उसे समझ में नहीं आया . लेकिन एक-दो मिनट में ही वो चैतन्य हो गई,  धीरे से उठी और पूजाघर में गई . एक अगरबत्ती जलाई और ईश्वर को प्रणाम किया  और फिर से सोफे पे आकर बैठ गई.

उसका ठंडा हाथ हाथों में लिया और बोली " चलो कहां घूमने जाना है और क्या बातें करनी हैं तम्हे " बोलो !! ऐसा कहते हुए उसकी आँखें भर आईं. वो एकटक उसे देखती रही , आंखों से अश्रुधारा बह निकली .
उसका सिर उसके कंधों पर गिर गया. ठंडी हवा का धीमा झोंका अभी भी चल रहा था ................

यही जिंदगी है     ❓
नहीं।

संसाधनों का अधिक संचय न करें, ज्यादा चिंता न करें,  सब अपना अपना नसीब ले कर आते हैं।अपने लिए भी जियो, वक्त निकालो।।।।।

Saturday, April 4, 2015

ज़ाफ़रान के फूल

फ़िरदौस ख़ान
जब भी घर का ज़िक्र आता है तो आंखों के सामने क्यारियों में खिले ज़ाफ़रान के फूल महकने लगते हैं. बरसों पहले अब्बू ज़ाफ़रान के पौधे लाए थे. अब अब्बू इस दुनिया में नहीं हैं, बस उनकी यादगार के तौर पर ज़ाफ़रान के पौधे हैं, उनके फूल हैं, और अब्बू की नसीहतों से महकती उनकी यादें हैं. हमारे यहां बरसों से ग़ुलाम मुहम्मद आ रहे हैं. हर साल सर्दियों में हम उन्हीं से गर्म कपड़े और शालें ख़रीदते हैं. उन्हें भी ज़ाफ़रान के पौधे बहुत अज़ीज़ हैं, कहते हैं कि इन्हें देखकर अपने वतन की याद आ जाती है.
ज़मीं की जन्नत माने जाने वाले कश्मीर की ख़ूबसूरत वादियों में महकते ज़ाफ़रान के फूल फ़ारसी से इस शेअर की याद दिला देते हैं-
गर फ़िरदौस बररू-ए- ज़मीं अस्त हमीं अस्तो हमीं अस्तो हमीं अस्त
यानी अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है यहीं है यहीं है...
सदियों से कश्मीर में ज़ाफ़रान की खेती हो रही है. कहा जाता है कि क़रीब आठ सौ साल पहले ख्वाजा मसूद और हज़रत शे़ख शरी़फ़ुद्दीन मध्य-पूर्वी एशिया से ज़ाफ़रान का पौधा अपने साथ लाए थे. यहां आकर वे बीमार हो गए और तब एक हकीम ने उनका इलाज किया. इस पर ख़ुश होकर उन्होंने ज़ाफ़रान का पौधा हकीम को दे दिया. इसलिए ज़ाफ़रान की पैदावार के वक़्त पंपोर की इन सूफ़ियों के मक़बरे वाली मस्जिद में नमाज़ भी अदा की जाती है. हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि यहां ज़ाफ़रान की खेती का सिलसिला दो हज़ार साल से भी ज़्यादा पुराना है.
ज़ाफ़रान को केसर भी कहा जाता है. इसका मूल स्थान दक्षिण यूरोप है. हालांकि दुनिया के कई देशों में इसकी खेती होती है. इनमें भारत, चीन, तुर्किस्तान, ईरान, ग्रीस, स्पेन, इटली फ्रांस, जर्मनी, जापान, रूस, आस्ट्रिया और स्विटज़रलैंड शामिल हैं. स्पेन दुनिया का सबसे बड़ा ज़ाफ़रान उत्पादक देश है, जबकि ईरान दूसरे दर्जे पर है. इन दोनों देशों में सालाना क़रीब तीन सौ टन ज़ाफ़रान का उपादान होता है, जो कुल उत्पादन का 80 फ़ीसदी है. भारत में इसकी खेती जम्मू-कश्मीर में होती है. जम्मू कश्मीर के कृषि मंत्री ग़ुलाम हसन के मुताबिक़ 2009-2010 के दौरान प्रदेश में 83 क्विंटल ज़ाफ़रान का उत्पादन हुआ. इसमें से 80 क्विंटल का उत्पादन जम्मू डिवीजन के पम्पोर में और 3.60 क्विंटल का उत्पादन कश्मीर के किस्तवार ज़िले में हुआ. ज़ाफ़रान की खेती का रक़बा भी साल 2000 के 2931 हेक्टेर के मुक़ाबले 2010-11 में ब़ढकर 3785 हो गया है.
साल के अगस्त-सितंबर माह में इसके कंद रोपे जाते हैं. अक्टूबर-दिसंबर तक इसमें पत्तियां आ जाती हैं और फूल खिलने लगते हैं, जो अपनी भीनी-भीनी महक से माहौल को ख़ुशनुमा बना देते हैं. ज़ाफ़रान की खेती के लिए समुद्रतल से क़रीब दो हज़ार मीटर ऊंचे पहाड़ी इलाक़े और शीतोष्ण सूखी जलवायु की ज़रूरत होती है. पौधे के लिए दोमट मिट्टी अच्छी रहती है. ज़ाफ़रान का पौधा बहुवर्षीय होता है और यह 15 से 25 सेमी ऊंचा होता है. पत्तियां घास तरह लंबी, पतली और नोकदार होती हैं. इसमें बैगनी रंग की फूल खिलते हैं. फूल में ज़ाफ़रान के तंतु होते हैं. इसके बीज आयताकार, तीन कोणों वाले होते हैं. ज़ाफ़रान के फूलों को चुनकर छायादार जगह पर बिछा दिया जाता है. सूख जाने पर फूलों से ज़ाफ़रान को अलग कर लिया जाता है. ज़ाफ़रान के रंग और आकार के हिसाब से उन्हें मागरा, लच्छी, गुच्छी आदि हिस्सों में बांट दिया जाता है. क़रीब डेढ़ लाख फूलों से एक किलो ज़ाफ़रान मिलता है, जिसकी क़ीमत डेढ़ लाख रुपये से ज़्यादा है.
ग़ुलाम मुहम्मद बताते हैं कि ज़ाफ़रान के पौधे का हर हिस्सा इस्तेमाल में लाया जाता है. ज़ाफ़रान की पंखड़ियों की सब्ज़ी बनाई जाती है. इसके डंठल जानवरों को खाने के लिए दे दिए जाते हैं. वह कहते हैं कि ज़ाफ़रान के फूल खिलने के दौरान यहां के बाशिंदों की ज़िन्दगी में काफी बदलाव आ जाता है. फ़िज़ां में बिखरी ज़ाफ़रान की ख़ुशबू, और हर जगह ज़ाफ़रान की ही बातें. इस दौरान तो भिखारी भी ज़ाफ़रान के फूलों का ही सवाल करते हैं. बाग़बां भी ज़ायक़ेदर फलों के बदले ज़ाफ़रान के महकते फूल ही लेना पसंद करते हैं.
ज़ाफ़रान एक औषधीय पौधा है और दवाओं में इसका इस्तेमाल होता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक़ ज़ाफ़रान में तेल 1.37 फ़ीसदी आर्द्रता 12 फ़ीसदी, पिक्रोसीन नामक तिक्त द्रव्य, शर्करा, मोम, प्रोटीन, भस्म और तीन रंग द्रव्य पाएं जाते हैं. अनेक खाद्य पदार्थों ख़ासकर मिठाइयों में ज़ाफ़रान का इस्तेमाल किया जाता है.
इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ एल अकीला और ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध में कहा गया है कि बुढ़ापे में ज़ाफ़रान की मदद से अंधेपन को रोका जा सकता है. हर रोज़ ज़ाफ़रान खाने से बीमारियों के ख़िलाफ़ आंखों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. शोध दल के प्रमुख प्रोफेसर सिलविया बिस्ती का कहना है कि केसर में कई गुण होते हैं जो रोशनी के लिए रक्षक का काम करते हैं.
बाज़ार में नक़ली ज़ाफ़रान की भी भरमार है. इसलिए असली ज़ाफ़रान की पहचान ज़रूरी है. असली ज़ाफ़रान पानी में पूरी तरह घुल जाता है. ज़ाफ़रान को पानी में भिगोकर कपड़े पर रगड़ने से अगर ज़ाफ़रानी रंग निकले तो उसे असली ज़ाफ़रान समझना चाहिए और और पहले लाल रंग निकले और बाद में पीला पड़ जाए तो वह नक़ली ज़ाफ़रान होगा.
बहरहाल, राजधानी दिल्ली में हम ज़ाफ़रान के पौधे तलाश रहे हैं. शायद कहीं मिल जाएं...

Thursday, April 2, 2015

रूको सोचो फिर पोस्ट करो

कानपुर, जागरण संवाददाता : रुको, सोचो और फिर पोस्ट करो.. (स्टाप, थिंक एंड पोस्ट)। इस फंडे को अपनाकर साइबर क्राइम से बचा जा सकता है। गुरुवार को रागेंद्र स्वरूप सभागार में साइबर क्राइम पर आयोजित गोष्ठी में साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने स्कूली छात्र-छात्राओं को टिप्स दिए। बाद में पुलिस लाइन सभागार में पुलिस कर्मियों को साइबर क्राइम पर लगाम लगाने के उपाय बताए। इस दौरान डीआईजी नीलाब्जा चौधरी व एसएसपी शलभ माथुर समेत पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।
व्यक्तिगत ब्यौरा पूरा न दें..
शादी या नौकरी के लिए ब्यौरा भेजते समय हमेशा नई ईमेलआईडी का प्रयोग करें। उतनी ही जानकारी दे जिससे निजी जीवन से कोई छेड़छाड़ न कर सके। साथ ही कंपनी की साइट खोलकर एचआर की ईमेल से संपर्क कर पूरी जानकारी लेने के बाद ही आगे की प्रक्रिया करें।
एटीएम कार्ड के पीछे के तीन अंक मिटा दें
एटीएम फ्राड से बचने को कार्ड पीछे लिखे सात नंबरों में से पीछे के तीन अंक मिटा देने चाहिए। कार्ड हस्ताक्षर जरूर करें,ताकि कार्ड खोने पर अगर कोई उससे खरीदारी करता है तो हस्ताक्षर मिसमैच करने पर पकड़ा जायेगा क्योंकि स्लिप पर साइन कार्ड के साइन से मिलाए जाते हैं। एटीएम से पैसा निकालने और शापिंग करने के बाद कोड जरूर बदल दें। एटीएम से निकली स्लिप को फाडकर ही फेंके।
फोन मेमोरी में ही सेव करें डाटा, प्रयोग करें लाक अप्लीकेशन
कोई भी डाटा खास तौर पर पर्सनल फोटो कभी भी मेमोरी कार्ड में सेव नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसे आसानी से कोई भी चुरा सकता है। साथ ही लाक अप्लीकेशन का भी प्रयोग करना चाहिए। इससे मोबाइल या लैपटाप खोने की स्थिति में कोई भी आपका पर्सनल डाटा प्रयोग नहीं कर सकता। लैपटाप या मोबाइल खोलने को उसे लाक होने के चलते फारमेट करना पड़ेगा। फारमेट होते ही आप का पर्सनल डाटा उड़ जाएगा और आप साइबर क्राइम से बच सकेंगे।
कोई साइबर क्राइम होते ही सरकारी साइट पर करें शिकायत
किसी भी प्रकार का साइबर क्राइम होने पर सरकारी वेबसाइट ष्द्गह्मह्ल-द्बठ्ठ.श्रह्मद्द.द्बठ्ठ पर इंसीडेंट रिपोर्टिग पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही स्थानीय थाने या एसएसपी कार्यालय से संपर्क कर शिकायत जरूर दर्ज कराएं। इससे आप की समस्या का समाधान हो या न हो, लेकिन आपके डाटा या इलेक्ट्रानिक डिवाइस के प्रयोग से होने वाले क्राइम को रोका जा सकेगा।
बिक्री की साइट पर अपना पता कभी न दें
फोटो खींचों और बेंचों के चक्कर में किसी फ्राड के चक्कर से बचने को कभी अपना पूरा पता नहीं देना चाहिए। साथ ही दूसरी तरफ से संपर्क करने पर जांच परख के बाद ही आगे की कार्रवाई करें।
कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- साइबर कैफे पर कभी भी अपनी पर्सनल सेटिंग का काम न करें।
- साइट एप्स की जगह ब्राउजर से जाएं।
- गूगल सिंक को हमेशा बंद रखे। इसके खुले होने आपका पर्सनल डाटा भी गूगल पर साझा हो जाएंगे।
-असली व नकली साइट का ध्यान रखकर ही काम करें।
- तड़के या रात में सूनसान जगह के एटीएम का प्रयोग न करें।
- बैंक द्वारा दिया गया पिनकोड बदल यूनीक कोड डालें (अक्षर व अंक का मिला जुला कोड)।
- मोबाइल फोन पर बैंक खाता नंबर व पासवर्ड कभी सेव न करें।
- ह्लह्मह्वद्गष्ह्म4श्चह्ल इलेक्ट्रानिक डिवाइस को लाक करने के एप्स डाउनलोड करें।
- व्हाट्सएप पर निजी फोटो व पर्सनल चैट करने से बचें।

नशा मुक्त

5 लाँख/- की गाडी मे
कभी मिट्टी का तेल नही डालते...

क्यों ?
 
गाडी का इंजन खराब हो जायेगा...

5 लाँख/- की गाडी की तुमको इतनी चिंता है ?

कभी मुह मे शराब या गुटका डालने के पहले सोचा की किडनी , लिवर खराब हो गया तो...

करोडो के इस अनमोल शरीर के इंजन की भी उतनी ही चिंता करो जितनी अपनी गाडी की करते हो...

दुनियाँ के लिए आप एक व्यक्ति हैं....

लेकिन परिवार के लिए आप पूरी दूनियाँ हैं..
आप अपना ख्याल रखें...
व्यसन से दुर रहीये....
����Om shanti����

Wednesday, April 1, 2015

उल्टी सलवार

उल्टी सलवार"

"साब अब मेरा काम हो जाएगा ना"
उसने दीवार की ओर रुख किया और तेजी से कपड़े पहनने लगी।
"हां हां भई" ... मेरी सांसें अभी भी दुरुस्त नहीं हुई थीं।
फिर पैसे लेने कब आऊँ?
"दुपट्टे से उसने मुंह पोंछ और फिर झटक कर लपेट लिया।"
पैसे मिलने तक आपको एक दो चक्कर तो लगाने ही पड़ेंगे .
कल ही में मालिकों से तुम्हारे पति का जिक्र करता हूँ
"मैंने शर्ट के बटन लगाए, हाथों से बाल संवारने और कार्यालय के पीछे रिटायरिंग रूम के दरवाजे से बाहर झांक कर आसपास अहतयाता नज़र दौड़ा कर जायजा लिया ।
मैं किसी मुश्किल में गिरफ्तार नहीं होना चाहता था।
"फिर मैं कल ही आ जाउं"
वह मेरे पुख्ता जवाब के इन्तजार में थी।
"कल नहीं! ! !
"मैं रोज इस तरह यहाँ आने का जोखिम नहीं ले सकता था
उसे देखते हुए बस आह भर कर रह गया .....
गरीबों को भी कैसे कैसे लाल मिल जाते हैं ...
मैंने नज़रों से उसके शरीर को तौलता हुए सोचा।
तभी मेरी निगाह उसकी उलटी पहनी हुई सलवार के रेशमी धागों पर पड़ी l
"अरे सुनो! ! आपने सलवार उलटी पहनी है।
"वह चौंककर अपनी टांगों की और झुकी और सीधी हो गई।"
उसे उतारकर सीधी कर लो।
मैं चलता हूँ पांच मिनट बाद तुम भी पिछले दरवाजे से निकल जाना। । ।
और हाँ ध्यान से कोई देख न ले तुम्हें।

अजमल खान चार साल से हमारी कारखाने में रात का चौकीदार था
तीन सप्ताह पहले कारखाने में प्रवेश करने वाले डाकुओं के साथ प्रतिरोध में पैर पर गोली खाकर घर में लाचार पड़ा हुआ था।
मालिकों ने उसके इलाज के लिए पचास हजार देने की घोषणा कर भूल गए थे।
सो उसकी पत्नी इसी सिलसिले में बार-बार चक्कर लगा रही थी।
मैंने उसकी मदद का फैसला किया और छुट्टी के बाद शाम में उसे कारखाने आने का संकेत दे दिया।

उमर! उमर!
अपार्टमेंट की सीढ़ियां चढ़ते हुए मुझे अपनी पत्नी की आवाज सुनाई दी।
उसके और मेरे घर लौटने का समय लगभग एक ही था और ...
कभी कभी तो हम इसी तरह इकट्ठे घर में प्रवेश करते थे।
वह एक छोटे बैंक में क्लर्क थी।

"एक खुशखबरी है"
खुशी से उसकी बांछे खिल जा रही थीं "प्रबंधक साहब मेरे काम से खुश हैं और आज ही उन्होंने मेरे प्रोमोशन की बात की है"
दरवाजे के सामने रुक कर उस ने हैंडबैग टटोल कर चाबी निकाली।
"उन्होंने कहा है थोड़ा समय लगेगा लेकिन काम हो जाएगा"
अरे वाह बधाई "" मैंने उसे बधाई दी
"तुम्हें पता है मेरे सहित पांच उम्मीदवार हैं, और वह आसफा है ना वो भी मेरे पक्ष में नहीं मगर डाईरैक्ट्र साहब मेरे काम से खुश हैं ..
क्यों न हो , मैं इतनी मेहनत जो करती हूं और वैसे भी।।।।।
वह घर के अंदर दाखिल होते हुए भी लगातार बोले चली गई।
मैं उसकी उसकी तरक्की की दास्तान से खुश हो रहा था कि अचानक
मेरी नज़र उसकी उलटी सलवार के रेशमी धागों में उलझ गई।

__ सआदत हसन मंटो

Saturday, March 28, 2015

India is great

भारत में सर्वाधिक बड़ा, लम्बा एवं ऊँचा (Most Important )
================­
1. सबसे लम्बा सड़क पुल - महात्मा गाँधी सेतु, पटना
2. सबसे बड़ा पशु मेला - सोनपुर (बिहार)
3. सबसे ऊँची मीनार - कुतुबमीनार (दिल्ली)
4. सबसे बड़ी झील - चिल्का झील (ओडिशा)
5. सबसे ऊँचा गुरुत्वीय बाँध - भाखड़ा बाँध (पंजाब)
6. सबसे बड़ा रेगिस्तान- थार (राजस्थान)
7. सबसे बड़ा गुफा मंदिर - कैलाश मंदिर (एलोरा)
8. सबसे बड़ी मस्जिद - जामा मस्जिद (दिल्ली)
9. सबसे बड़ा चिड़ियाघर - जूलॉजिकल गार्डन (कोलकाता)
10. सबसे ऊँची चोटी - गॉडविन ऑस्टिन (K-2)
11. सबसे लम्बी सुरंग - जवाहर सुरंग (जम्मू-कश्मीर)
12. सबसे बड़ा डेल्टा - सुन्दरवन डेल्टा (पश्चिम बंगाल)
13. सबसे अधिक वनों वाला राज्य - मध्य प्रदेश
14. सबसे बड़ा कॉरिडोर - रामेश्वरम मन्दिर (तमिलनाडु)
15. सबसे ऊँचा झरना या जलप्रपात - जोग (कर्नाटक)
16. सबसे लम्बी सड़क - ग्रैंड ट्रंक रोड
17. सबसे ऊँचा दरवाजा - बुलन्द दरवाजा
18. सबसे लम्बी नदी - गंगा नदी
19. सबसे बड़ा अजायबघर - चेन्नई अजायबघर
20. सबसे बड़ा गुम्बज - गोल गुम्बज (बीजापुर)
21.सबसे ऊँची मूर्ति - गोमतेश्वर (कर्नाटक)
22. सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान - मासिनराम (मेघालय)
23. सबसे बड़ा लीवर पुल - हावड़ा ब्रिज (कोलकाता)
24. सबसे लम्बी नहर - इन्दिरा गाँधी नहर (राजस्थान)
25. सबसे लम्बा रेलवे प्लेटफॉर्म - गोरखपुर(उत्तरप्रदेश)
26. सबसे विशाल स्टेडियम - युवा भारती (कोलकाता)
27. सर्वाधिक आबादी वाला शहर - दिल्ली
28. सर्वाधिक शहरी क्षेत्र वाला राज्य - महाराष्ट्र
29. सबसे लम्बा रेलमार्ग - डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी
30. सबसे बड़ा प्राकृतिक बन्दरगाह - मुंबई (महाराष्ट्र)
31.सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग - राष्ट्रीय राजमार्गसंख्या-7 (वाराणसी से कन्याकुमारी)
32.सबसे लम्बी तटरेखा वाला राज्य - गुजरात
33. खारे पानी की सबसे बड़ी झील - चिल्का झील(ओडिशा)
34. मीठे पानी की सबसे झील - वूलर झील (जम्मू-कश्मीर)
35. सबसे लम्बी सहायक नदी - यमुना
36. दक्षिण भारत की सबसे लम्बी नदी - गोदावरी
37. सबसे लम्बा बाँध - हीराकुड बाँध(ओडिशा)
38. सर्वोच्च शौर्य सम्मान - परमवीर चक्र
39. सर्वोच्च सम्मान - भारत रत्न
40. सबसे बड़ा गुरुद्वारा - स्वर्ण मंदिर (अमृतसर)
41. सबसे बड़ा गिरजाघर - सेंट कैथेड्रल (गोवा)
42. सबसे ऊँचा टीवी टावर - पीतमपुरा (नई दिल्ली)
43. सबसे लम्बा समुद्रतट - मैरिना बीच (चेन्नई)
44. सर्वाधिक मार्गबदलने वाली नदी - कोसी नदी
45. सबसे बड़ा नदीद्वीप - माजुली (ब्रह्मपुत्र नदी, असम)
46. सबसे बड़ा तारामंडल - बिड़ला प्लैनेटेरियम(कोलकाता­)
47. सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल) - राजस्थान
48. सबसे बड़ा राज्य (जनसंख्या) - उत्तर प्रदेश
49. सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित युद्धस्थल - सियाचिनग्लेशियर
50. सबसे ऊँचा हवाई पत्तन - लेह
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