एक दिन क्लास में कोई शिक्षिका नहीं थी, तब रोहन ने अपने पास वाले लड़के की किताब उठाई और फाड़ डाली। उस लड़के ने ऐसा करने पर रोहन को एक थप्पड़ मार दिया। रोहन गुस्से से पागल हो गया। उसने कुछ नहीं सोचा और कुर्सी उठाई और उसकी कमर में जोर से मार डाली उसकी रीड की हड्डी टूट गई। स्कूल से उसे निकाल दिया। कोई भी स्कूल उसे अपने यहाँ पर पढाने को तैयार था।
एक दिन रोहन के पापा ने उसे अपने पास बुलाया और कुछ आलू देते हुए उससे कहा कि, इन आलुओ में से उतने आलू उठाओ जितने लोगो से तुम नफरत करते हो। रोहन को कुछ समझ नहीं आया कि उसके पापा ऐसा क्यों बोल रहे है, परन्तु फिर भी उसने उनके कहने से 9 आलू उठा लिए क्यूंकि वह 9 लोगो से बहुत नफरत करता था। उसके पापा ने कहा जब भी कही तुम जाओ ये आलू अपने साथ रखना और अगर तुम्हे और लोगो पर भी गुस्सा आने लगे तो तुम उतने ही आलू और रख लेना।
पापा के कहने पर रोहन ने ऐसे ही किया। वह जहाँ भी जाता उन आलुओ को अपने साथ ले जाता। आलू में बहुत अधिक बजन था, आलू बहुत अधिक थे। रोहन को अपने पापा पर गुस्सा आ रहा था, परन्तु स्कूल से निकाल देने के बाद वह उनसे कुछ बोल भी नहीं सकता था। दो तीन दिन में ही आलू सड़ने लगे और उनसे गन्दी बदबू आने लगी। अब रोहन उनको अपने पास नहीं रख पा रहा था। वह अपने पापा के पास गया और बोल दिया कि, मै इन आलुओ को अब नहीं रख पाउगा। पहले तो इनमे केवल वजन था, परन्तु अब इनसे गन्दी बदबू आने लगी है। इतना कहकर वह चुप हो गया।
रोहन के पिता ने उसे अपने पास बुला कर कहा कि, बेटा जिस तरह सड़े आलुओ की बदबू से हमें सास लेने में परेशानी होती है। उसी प्रकार घृणा और दूसरों के प्रति नफ़रत की भावना भी हमें सुकून से जीने नहीं देती। नफ़रत और घृणा भी सड़े आलुओ के जैसे ही होती है, जो लगातार हमारे मन को दूषित करती है। जब तुम सड़े आलुओ के साथ कुछ दिन रह नहीं पाये, फिर क्या अपने दूषित मन के साथ पूरी ज़िन्दगी रह पाओगे।
दोस्तों नफरत और दूसरों के प्रति गलत विचार सबसे ज्यादा बुरा असर आपके खुद के जीवन पर डालते है। दूसरों के प्रति गलत भावना रखकर आप कभी अपने जीवन में खुश नहीं रह सकते। गुस्सा, नफ़रत और दुसरो के प्रति गलत विचार आपकी ज़िन्दगी को इतना खोकला बना देती है, कि वह केवल अन्दर से ही नहीं बाहर से भी आपको खुद भद्दी लगने लगती है। आपका मन एक ऐसी जगह होती है, जहा जो बोते है वह सबसे ज्यादा पनपता है, चाहे वह ‘प्यार’ हो या किसी के लिए ‘नफरत’।
खुश रहना सीखो और आनंदमय जीवन जीने के लिए दूसरों को माफ़ करना सीखो।
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