Tuesday, September 26, 2017

लोकतंत्र

जोज़फ इस्टालिन एक बार अपने साथ संसद में एक मुर्गा लेकर आये,

और सबके सामने उसका एक-एक पंख नोचने लगे,

मुर्गा दर्द से बिलबिलाता रहा मगर,

एक-एक करके इस्टालिन ने सारे पंख नोच दिये,

फिर मुर्गे को फर्श पर फेंक दिया,

फिर जेब से कुछ दाने निकालकर मुर्गे की तरफ फेंक दिए और चलने लगा,

तो मुर्गा दाना खाता हुआ इस्टालिन के पीछे चलने लगा,

इस्टालिन बराबर दाना फेंकता गया और मुर्गा बराबर दाना मु्ँह में ड़ालता हुआ उसके पीछे चलता रहा।

आखिरकार वो मुर्गा इस्टालिन के पैरों में आ खड़ा हुआ।

इस्टालिन स्पीकर की तरफ देखा और एक तारीख़ी जुमला बोला,

"लोकतांत्रिक देशों की जनता इस मुर्गे की तरह होती है,

उनके हुकमरान जनता का पहले सब कुछ लूट कर उन्हें अपाहिज कर देते हैं,

और बाद में उन्हें थोड़ी सी खुराक देकर उनका मसीहा बन जाते हैं"।

*This is our position at present...*.

2019 के लिए तैयार रहें। बहुत जल्द जनता को दाने फेके जाएंगे।

Monday, September 25, 2017

हंस और हंसनी

👍🍃🍂🌿🌾🌾🌾🌾🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये!

हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ??

यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा !

भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज की रात बीता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे !

रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उस पर एक उल्लू बैठा था।

वह जोर से चिल्लाने लगा।

हंसिनी ने हंस से कहा- अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते।

ये उल्लू चिल्ला रहा है।

हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ??

ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही।

पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों की बातें सुन रहा था।

सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई, मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ करदो।

हंस ने कहा- कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद!

यह कहकर जैसे ही हंस अपनी हंसिनी को लेकर आगे बढ़ा

पीछे से उल्लू चिल्लाया, अरे हंस मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जा रहे हो।

हंस चौंका- उसने कहा, आपकी पत्नी ??

अरे भाई, यह हंसिनी है, मेरी पत्नी है,मेरे साथ आई थी, मेरे साथ जा रही है!

उल्लू ने कहा- खामोश रहो, ये मेरी पत्नी है।

दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पूरे इलाके के लोग एकत्र हो गये।

कई गावों की जनता बैठी। पंचायत बुलाई गयी।

पंचलोग भी आ गये!

बोले- भाई किस बात का विवाद है ??

लोगों ने बताया कि उल्लू कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है और हंस कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है!

लम्बी बैठक और पंचायत के बाद पंच लोग किनारे हो गये और कहा कि भाई बात तो यह सही है कि हंसिनी हंस की ही पत्नी है, लेकिन ये हंस और हंसिनी तो अभी थोड़ी देर में इस गाँव से चले जायेंगे।

हमारे बीच में तो उल्लू को ही रहना है।

इसलिए फैसला उल्लू के ही हक़ में ही सुनाना चाहिए!

फिर पंचों ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि सारे तथ्यों और सबूतों की जांच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की ही पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है!

यह सुनते ही हंस हैरान हो गया और रोने, चीखने और चिल्लाने लगा कि पंचायत ने गलत फैसला सुनाया।

उल्लू ने मेरी पत्नी ले ली!

रोते- चीखते जब वह आगे बढ़ने लगा तो उल्लू ने आवाज लगाई - ऐ मित्र हंस, रुको!

हंस ने रोते हुए कहा कि भैया, अब क्या करोगे ??

पत्नी तो तुमने ले ही ली, अब जान भी लोगे ?

उल्लू ने कहा- नहीं मित्र, ये हंसिनी आपकी पत्नी थी, है और रहेगी!

लेकिन कल रात जब मैं चिल्ला रहा था तो आपने अपनी पत्नी से कहा था कि यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ उल्लू रहता है!

मित्र, ये इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए नहीं है कि यहाँ उल्लू रहता है।

यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ पर ऐसे पंच रहते हैं जो उल्लुओं के हक़ में फैसला सुनाते हैं!

शायद 65 साल की आजादी के बाद भी हमारे देश की दुर्दशा का मूल कारण यही है कि हमने उम्मीदवार की योग्यता न देखते हुए, हमेशा ये हमारी जाति का है. ये हमारी पार्टी का है के आधार पर अपना फैसला उल्लुओं के ही पक्ष में सुनाया है, देश क़ी बदहाली और दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैँ!

"कहानी" अच्छी लगे तो आगे भी बढ़ा दें...

Friday, September 22, 2017

गरीब घर की बेटी

चौदह साल की मुनिया पड़ोस के घर से झाड़ू- पोंछा करके अपने घर आई।
चारपाई पे लेटा उसका बाप गुस्से से आग-बबूला होके बोलाः
रे करमजली! कहाँ मुँह काला करवा रही थी।
एक घंटा देर से आ रही है।
बापू! वो उनके घर कूछ मेहमान आने वाले थे,
तो पोंछा लगाने का काम आज ज्यादा करना पड़ा।
इसलिये देर हो गई।
अबे! भाग करमजली जाकर घर के काम अपने निपटा
अभी मुनिया रूम मेँ ही आई की छोटे भाई ने नाश्ता माँगा।
मुनिया के बताने पे कि नाश्ता नहीँ बना,
भाई ने उसकी पीठ पे एक मुक्का तान के मार दिया।
कमीनी मुझे खेलने जाना है भूख लगी है, जल्दी रोटी बना।
दोपहर मेँ जब कोई नहीँ था तो मुनिया अकेले मेँ रो रही थी,
पालतू कुत्ता शेरू उसके समीप आके जीभ से दुलार करने लगा।
मुनिया शेरू से लिपट के रो पड़ी और बोलीः
भगवान! किसी भी जन्म मेँ मुझे गरीब घर की बेटी मत बनाना,
अगर गरीब की बेटी बनाना तो माँ के साथ ही मुझे भी ऊपर बुलाना !..

पासवर्ड

पासवर्ड का एक यूज़ यह भी.....
एक बार एक अजनबी ने एक आठ साल की लड़की से कहा की बेटा तुम मेरे
साथ चलो I तुम्हारी मम्मी ने तुम्हे बुलाया है और उन्होंने मुझे तुम्हे लेने के
लिए भेजा है I लड़की ने कहा ठीक है I मै आपके साथ चलूंगी I मेरी माँ ने
आपको एक पासवर्ड बताया होगा , जो उन्हें और मुझे ही पता है I आप
पहले वह पासवर्ड मुझे बताए I अजनबी सकपका गया और वहा से खिसक
लिया I दरअसल इस बच्ची और उसकी माँ ने आपस में तय किया हुआ
था की अगर कभी बच्ची को लेने किसी अजनबी को भेजने की नौबत आई
तो माँ उसे पासवर्ड बताएगी और बच्ची भी उस पासवर्ड को जान लेने के
बाद ही उस अजनबी के साथ आएगी I
देखा न कितना आसान सा तरीका है बच्चो को किसी दुर्घटना से बचाने
का I आप भी अपने बच्चो के साथ ऐसा ही पासवर्ड तय कर सकते है ।

Tuesday, September 19, 2017

अमेरिका सबसे धनी देश है, वहां के स्कूल साल के शुरुआत में बच्चों को किताबें इशू करते हैं और साल के अंत में उनसे जमा करा लेते है ताकि दुसरे बच्चों को उन किताबों को पढने का मौका मिले. भारत गरीब देश है, पर यहाँ हर साल पुराने किताबों को रददी के भाव बेच दिया जाता है और नए किताबों को ख़रीदा जाता है, या यूँ कहें की अभिभावकों को नई किताब खरीदने को विवश किया जाता है .....करोड़ो रुपयों की बर्बादी लाखों पेड़ की कटाई .... फिर पर्यावरण को बचाने की सतरंगी मुहीम फिर करोड़ों रूपये की लुट, .. ये हमारे शिक्षा के मंदिर और और उसे संचालित करने वाले दलालों द्वारा हो रहा है .... सत्ता तो बदल गयी पर व्यवस्था नही बदली आइये मानव संसाधन विभाग को जरा कुम्भ्करणी नींद से जगाया जाये ...

अमेरिका सबसे धनी देश है, वहां के स्कूल साल के
शुरुआत में बच्चों को किताबें इशू करते हैं और साल
के अंत में उनसे जमा करा लेते है ताकि दुसरे
बच्चों को उन किताबों को पढने
का मौका मिले.
भारत गरीब देश है, पर यहाँ हर साल पुराने किताबों को रददी के भाव बेच
दिया जाता है
और नए किताबों को ख़रीदा जाता है, या यूँ
कहें की अभिभावकों को नई किताब खरीदने
को विवश
किया जाता है .....करोड़ो रुपयों की बर्बादी लाखों पेड़
की कटाई .... फिर पर्यावरण को बचाने की सतरंगी मुहीम फिर
करोड़ों रूपये की लुट, .. ये
हमारे शिक्षा के मंदिर और और उसे संचालित
करने वाले दलालों द्वारा हो रहा है .... सत्ता तो बदल गयी पर
व्यवस्था नही बदली
आइये मानव संसाधन विभाग
को जरा कुम्भ्करणी नींद से जगाया जाये ...

प्यार

प्यार
पति को आॅफिस के लिये विदा करके ,सुबह की भाग - दौड़ निपटा पढने को अखबार उठाया , कि डोर बेल बज उठी ।
"इस वक्त कौन हो सकता है !" सोचते हुए दरवाजा खोला। उसे मानों साँप सूँघ गया । पल भर के लिये जैसे पूरी धरती ही हिल गई थी । सामने प्रतीक खड़ा था ।
"यहाँ कैसे ?" खुद को संयत करते हुए बस इतने ही शब्द उसके काँपते हुए होठों पर आकर ठहरे थे ।
"बनारस से हैदराबाद तुमको ढूँढते हुए बामुश्किल पहुँचा हूँ ।" वह बेतरतीब सा हो रहा था । सजीला सा प्रतीक जैसे कहीं खो गया था ।
"आओ अंदर, बैठो ,मै पानी लाती हूँ ।"
"नहीं , मुझे पानी नहीं चाहिए, मै तुम्हें लेने आया हूँ , चलो मेरे साथ । "
"मै कहाँ , मै अब नहीं चल सकती हूँ कहीं भी ।"
"क्यों, तुम तो मुझसे प्यार करती हो ना !"
"प्यार ! शायद दोस्ती के लिहाज़ से करती हूँ ।"
"तुम्हारी शादी जबरदस्ती हुई है ।हमें अलग किया गया है । तुम सिर्फ मुझे प्यार करती हो ।"
"नहीं, तुम गलत सोच रहे हो प्रतीक । मै उस वक्त भी तुमसे अधिक अपने मम्मी - पापा से प्यार करती थी ,इसलिए तो उनके प्यार के आगे तुम्हारे प्यार का वजूद कमजोर पड़ गया । "
"लेकिन जिस इंसान से तुम्हारी शादी हुई उससे प्यार ......"
"बस, अब आगे कुछ ना कहना , वो मेरे पति है और मै सबसे अधिक उन्हीं से प्यार करती हूँ ।उनसे मेरा जन्मों का नाता है । "
"और मै, मै कहाँ हूँ ? "
"तुम दोस्त हो ,तुम परिकथाओं के राजकुमार रहे हो मेरे लिए, जो महज कथाओं तक ही सिमटे रहते है हकीकत से कहीं कोसों दूर ।"
"अच्छा , तो मै अब चलता हूँ । तुमसे एकबार मिलना था सो मिल लिया । " बाहर आकर जेब में हाथ डाल टिकट फाड़ कर वहीं फेंक बिना पलटे वो निकल गया और वह जाते हुए उसे अपलक , उसके ओझल होने तक ,युँ ही ,वहीं ठिठकी निहारती रही ।