Tuesday, December 27, 2016

छोटी हवेली

खटनपुर गाँव में जमींदारों के ज़माने से एक प्रथा चली आ रही थी  कि वो अपने ऐशो- आराम और मनोरंजन के लिए गाँव के किसी भी परिवार में कोई सुंदर लड़की  पैदा होती तो उसे उठवा लिया करते और छोटी हवेली में ही उसकी परवरिश करते १८ वर्ष तक उसे पाल पोस कर बड़ा किया जाता नृत्य आदि  की शिक्षा के साथ नाज़-नख़रे  तथा उठने बैठने के सलीके  भी सिखाये जाते.यह सब सिखाने में मुख्य भूमिका वहाँ  पीढ़ी दर पीढ़ी  रह रहीं उसी गाँव  की औरतें हुआ करतीं जिन्हें उनके बचपन में ही छोटी हवेली में लाया गया था. यह प्रथा सदियों  से चली आ रही थी जिससे डर कर जैसे ही  गाँव के किसी  परिवार में कोई बहू के माँ बनने का पता चलता परिवार वाले उसे मायके भेज देते.अगर बेटा पैदा होता तो बहू बच्चे को ले कर वापस अपने माता-पिता के गाँव आ जाती, बेटी पैदा  होने पर या तो उसे किसी रिश्तेदार के यहाँ छोड़ दिया जाता या बहू के मायके में ही उसकी परवरिश होती और सयानी होने पर किसी दूसरे गाँव में ब्याह दी जाती. फिर भी कुछ गरीब  परिवार भाग्य के भरोसे रह कर बहू को वहीं रहने देते और बेटा पैदा होने के लिए अंधविश्वासों का सहारा ले कर टोने टोटके करते पर बेटी पैदा होने पर जमींदार के आदमी  फिर बच्ची को जबरदस्ती यह कह कर ले ही जाते थे कि उनके पास रहेगी तो उसके ब्याह में दहेज़ देना पड़ेगा,परवरिश भी करनी पड़ेगी,जमींदार जी के यहाँ रहेगी तो सब कुछ बिना चिंता के निबट जायेगा..इस तरह इक्का-दुक्का परिवारों से ही लडकियाँ जमींदार की छोटी  हवेली में आ पातीं थीं.
जमींदार और उनका खानदान  बड़ी हवेली में रहता था. छोटी हवेली और बड़ी हवेली के बीच केवल एक दीवार थी. पर दोनों हवेलियों का आने जाने का रास्ता अलग था.
यहाँ तक कि कोई खिड़की कोई दरवाज़ा एक दूसरे के आमने सामने नहीं पड़ता था, न तो छोटी हवेली से कोई बड़ी हवेली में झाँक सकता था न बड़ी हवेली का कोई बाशिंदा छोटी हवेली की ओर रुख़  कर सकता था. हाँ, आँगन की दीवार  में एक झरोखा जरूर था जहाँ  से चाँदनी  रोहन को सितार बजाते छुप-छुप कर देखा करती थी.
कभी सितार की झंकार सुनते ही उसके पैर अनायास ही थिरक उठते और वह झूम- झूम कर नाच उठती.
रोहन जमींदार का बेटा था.चाँदनी को पैदा होते ही गाँव के ही एक परिवार से लाया गया था. वह जीवन के सोलह बसंत पार कर चुकी थी.पर छोटी उम्र से ही  वह
झरोखे से छुप- छुप कर रोहन को देखा करती थी कभी सितार बजाते हुए,कभी बैडमिनटन खेलते हुए.पर अचानक ही बड़ी हवेली से सितार बजने की आवाज़ आनी बंद
हो गयी.जब काफी दिनों तक सितार  नहीं बजी तो चाँदनी  उदास रहने लगी.उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हुआ?किसी से भी पूछ तक नहीं सकती थी बस टुकुर-टुकुर झरोखे से झाँका करती.असल में रोहन को पढ़ाई  करने  के लिए विदेश भेज दिया गया था. इधर समय बीतने के साथ चाँदनी  की नृत्य की शिक्षा पूरी हुई और अट्ठारह  बरस पूरे होने के उपलक्ष्य  में गाँव की नदी पार की महलनुमा हवेली में जश्न मनाया जाने वाला था.जिसमे आस- पास के सभी गावों से जमींदार शहर के बड़े अफसर बुलाये गए थे. चाँदनी  को पहली बार उस जश्न में अपना नृत्य पेश करना था.रोहन भी छुट्टियों में वहाँ  एक दिन पहले ही पहुँचा  था उसे भी जश्न में शामिल होने के लिए विशेष रूप से विदेश से बुलाया गया था.
जश्न में चाँदनी  के नृत्य की पहली झलक में ही रोहन उसकी सुन्दरता पर मुग्ध हो गया.उसने नदी पार की हवेली के जश्न के बारे में सुना तो था पर उसके सामने यह जश्न
पहली बार हुआ था.हालाँकि वह चाँदनी की सुन्दरता पर मुग्ध तो हुआ था पर अपने ही खानदान में मनाई जाने वाली इस परंपरा के बारे में जान कर उसे अच्छा नहीं लगा.  अपने घर के बड़े लोगों के सामने वह अपना मुँह  नहीं खोल सकता था, ऐसी शिक्षा उसे बचपन से ही दी गयी थी. करे तो क्या करे.जश्न के बाद रात भर करवटें बदलता रहा.सुबह
होते ही  अपना गिटार लेकर आँगन में आ गया चाँदनी  भी नहा कर आँगन की कच्ची धूप में अपने लम्बे  बाल सुखा रही थी.अचानक गिटार की मोहक धुन सुन कर उसने झरोखे से झाँक  कर देखा.वहाँ  रोहन को देख कर वह खुशी से झूम उठी और गिटार की धुन पर ही थिरकने लगी.रोहन इससे अनजान गिटार बजने में ही इतना व्यस्त था कि उसे पता ही नहीं चला कब उसकी उंगली गिटार के तार में फँस गयी  और खून बहने लगा. नाचते-नाचते अचानक चाँदनी  का ध्यान  झरोखे की तरफ गया तो रोहन के हाथ से खून बहता देख वह 'उई माँ' ' कहते हुए जोर से चिल्ला उठी. उसके चिल्लाने से रोहन का  ध्यान पहले अपने हाथ पर फिर झरोखे की तरफ गया. गिटार बजाना बंद कर  वह झरोखे की तरफ गया. चाँदनी  ने झट से अपना आँचल फाड़ कर काँपते  हुए हाथों से रोहन के हाथ में पट्टी बाँध  दी.दोनों की नज़रें  मिलीं.चाँदनी  के दिल की धड़कन तेज हो गयी और वह अपने आँचल में मुँह छुपा कर वहाँ  से दूर

छोटी हवेली

कहानी

Wednesday, September 21, 2016

सुबह-सुबह लौकी के जूस में शहद मिलाकर पीने से मोटापा और लीवर की सभी बीमारियों से पाएँ मुक्ति, जरूर पढ़े

सुबह-सुबह लौकी के जूस में शहद मिलाकर पीने से मोटापा और लीवर की सभी बीमारियों से पाएँ मुक्ति, जरूर पढ़े

SATURDAY, 10 SEPTEMBER 2016




  • आज के समय में हर कोई फिट रहने के लिए क्या कुछ नहीं करता है। जिससे कि उसकी बॉडी फिट रहें। लेकिन आजकल की लाइफस्टाइल बदलाव के कारण थोडा सी चूक में हमें कोई न कोई बीमारी अपनी चपेट में ले लेती हैं। जिससे बचना बहुत ही मुश्किल है। इसके लिए हम हल्दी ड्रिंक का रास्ता चुनते है। जिसके कारण आपका शरीर बीमारियों से आसानी से लड़ लेता हैं। www.allayurvedic.org
  • इसी में एक ड्रिंक है लौकी का जूस। जिसका सेवन करने से आपक कई बीमारियों से निजात पा जाते है। लेकिन अगर इसमें शहद मिला दिया तो इसको पीने का फायदा कई गुना अधिक बढ़ जाता है। जानिए इसे बनाने की विधि और फायदों के बारें में।
  1. मोटापा से दिलाएं निजात : इस जूस का सेवन करने से आपके शरीर में मेटाबॉल्जिम की मात्रा बढ़ जाती है। जिसके कारण आसानी से फैट बर्न होता है और आपका वजन कम हो जाता है।
  2. यूटीआई ठीक करे : मूत्र पथ संक्रमण की समस्या इस जूस के नियमित सेवन से ठीक होती है। यह यूरीन से एसिड के लेवल को कम करता है।
  3. प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद : इस जूस में भरपूर मात्रा में विटामिन, कैल्शियम, और फोलेट पाया जाता है। जो कि होने वाले बच्चें के लिए काफी फायदेमंद है। लेकिन इसका सेवन करने से पहले एक बार डाक्टर की सलाह जरुर लें।
  4. सिरदर्द और घबराहट से दिलाएं निजात : अगर आपको सिरदर्द या फिर अधिक घबराहट की समस्या है, तो इस जूस का सेवन करना फायदेमंद साबित हो सकता है। इस जूस को पीने से आपका दिमाग शांत रहेगा। www.allayurvedic.org
  5. लीवर संबंधी बीमारियों से निजात : अगर आपको लीवर संबंधी कोई भी बीमारी है, तो इसका सेवन तरना शुरु कर दें। इसका सेसवन करने से आपको किसी भी प्रकार की लीवर संबंधी बीमारी नहीं होगी।
➡ मिश्रण बनाने की विधि :
  • बस ताजी लौकी के कुछ फ्रेश पीस को ब्लेंडर में डालिए। फिर इसमें 1 चम्मच शहद मिलाइये। फिर इसे ब्लेंड कीजिए और यह जूस पीने के लिये तैयार हो जाएगा।

ये 8 बीज मोटापे की ऐसी छुट्टी करेंगे की जीवन में पलट कर कभी मोटापा नही आएगा, जरूर पढ़े और शेयर करे

ये 8 बीज मोटापे की ऐसी छुट्टी करेंगे की जीवन में पलट कर कभी मोटापा नही आएगा, जरूर पढ़े और शेयर करे

THURSDAY, 15 SEPTEMBER 2016





➡ मोटापे का 8 बीजों से सबसे बेस्ट घरेलु उपाय :
  • क्या आप भी सोचते है कि आजकल मोटापा एक प्रमुख समस्या (Major problem) है और वजन कम करना आसान नही काफी मुश्किल काम है समान रूप में वजन कम करने के लिए सख्त वर्कआउट (workouts) की तो जरूरत होती ही है साथ में कुछ अतिरिक्त पाउंड वजन कम करने के लिए आहार पर भी योजना बद्ध तरीके से काम करना पड़ता है अगर वजन कम करना आपका लक्ष्य है तो आपको मजबूत इच्छा शक्ति की आवश्यकता है आज हम आपको कुछ ऐसे 8 अद्भुत बीजों (Amazing Seeds) के बारे में बताने जा रहे है जो वास्तव में अद्भुत रूप से आपके लिए मददगार है, मोटापा तो निश्चित रूप से जायेगा और जीवन में कभी पलट कर नही आएगा, आइये जाने इन 8 अद्भुत बीजो के बारे में।www.allayurvedic.org  
  1. चिया बीज (Chia seeds) : चिया बीज (Chia seeds) बहुत कम कैलोरी (Low calorie) के साथ पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। इसमे लोहा,ओमेगा -3 फैटी एसिड,पोटेशियम और मैग्नीशियम से भरे होते हैं। अगर आप मोटापे की वजह से कम भोजन के शौकीन हो गये है तो चिया बीज आपके लिए उपयुक्त रहेगा वजन कम करने के लिए चिया बीज को सुपर बीज की श्रेणी में रखा गया है चूँकि चिया बीज पानी की बड़ी मात्रा को अवशोषित करने की क्षमता रखता है जिस कारण वह एक जेल पदार्थ बन जाता है और जब आप इसे खाते है तो पेट में जाने के बाद ये विस्तार (expand ) करने लगता है।
  2. अलसी का बीज (Linseed seeds) : अलसी बीज (Linseed seeds) में ओमेगा -3 फैटी एसिड होता है जो शरीर की इंसुलिन के स्तर को भी नियंत्रण करता है साथ में वसा को जलाने का काम भी करता है तथा फीटोएस्ट्रोजन्स भी उपस्थित होता है जो शरीर में हार्मोनल असंतुलन (Hormonal imbalance) से बचाने का काम बखूबी तो करता ही है साथ में बेमतलब का वजन को बढ़ावा देने वाले कारणों को भी रोकता है चूँकि अलसी के बीज में फाइबर, आयरन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होते है जिसकी वजह से आपको अधिक खाने की जरूरत नही होती और कम मात्रा में खाने पर भी आप की भूख को बहुत जल्दी शांत करती है। www.allayurvedic.org 
  3. क्विनोआ के बीज (Quinoa seeds) : इस बीज, एक दाने के समान सेवन किया जाता है, जो, प्रोटीन और फाइबर में उच्च है. इस लस मुक्त कार्बोहाइड्रेट का एक कप शामिल 8 प्रोटीन के ग्राम और लौह और मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है (Quinoa) चावल के लिए एक बहुत बढ़िया विकल्प नहीं है, फ्राइज़ में इस्तेमाल किया जा सकता, एक मल्टीग्रेन नाश्ते के लिए दलिया को जोड़ा जा सकता है या वेजी बर्गर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है क्विनोआ बीज देखने में अनाज की तरह ही लगता है लेकिन दोनों में काफी अंतर है। क्विनोआ के बीज में अमीनो एसिड,मैग्नीशियम, प्रोटीन, फाइबर और जिंक होता है इसके अलावा इसमे अन्य बीजो की तुलना कार्बोहाइड्रेट थोड़ा अधिक मात्रा में होता है क्विनोआ बीज का इस्तेमाल लोग अधिक ऊर्जा के लिए करते है पर आपके लिए चिंता की कोई बात नही है क्योकि यह अधिक ऊर्जा बिना मोटापे दिए प्रदान करता है अब आपको वजन कम करने के लिए बस करना इतना है कि इन बीजो को स्वादिष्ट बना कर रोजाना अपने भोजन में शामिल करना है आप इन बीजो की मदद से बिना पोषण की कमी के तेजी से वजन कम कर पाएंगे ये मूल में दक्षिण अमेरिकी की उत्पत्ति है।
  4. सूरजमुखी का बीज (Sunflower seeds) : सूरजमुखी के बीज प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर में जहर से लड़ने और सूजन को रोकने का काम प्राकृतिक रूप से करते है सूरजमुखी के बीज को आप स्नैक्स के रूप में भी खा सकते है यकीन करिए ये सूरजमुखी बीज आश्चर्यजनक लाभ से भरे हुए हैं ये विटामिन बी,विटामिन ई और मैग्नीशियम से समृद्ध होते है जो कोर्टिसोल (cortisol) हार्मोन को कम कर अतिरिक्त वजन बढने से रोकने के साथ-साथ चिंता का स्तर भी कम करने में सक्षम होते है सूरजमुखी के बीजों को खाने से हार्ट अटैक का खतरा कम होता है, कोलेस्ट्रॉल घटता है, त्वचा में निखार आता है तथा बालों की भी ग्रोथ होती है इनके बीजों में विटामिन सी होता है जो कि दिल की बीमारी को दूर रखने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद विटामिन ई कोलेस्ट्रॉल को खून की धमनियों में जमने से रोक कर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा टालता है एक चौथाई कप सूरजमुखी बीज 90 प्रतिशत तक का डेली विटामिन ई प्रदान करता है यदि आप चाहे तो सूरजमुखी का लाभ कच्चे तेल के रूप में भी लेकर कर सकते है। www.allayurvedic.org
  5. कद्दू के बीज (Pumpkin seed) : कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए कद्दू के बीज फायदेमंद होते है। स्टेरॉल्स और फिटोस्टेरॉल नामक तत्व से भरपूर कद्दू के बीज शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते है कद्दू के बीज मांसपेशियों के गठन और संतुलित रक्त शर्करा स्तर के जल को बढ़ावा देता है कद्दू के बीज जिंक और प्रोटीन बीज में सबसे होते है। कद्दू के बीज पाचन प्रणाली को स्वस्थ बनाए रखने अपनी सहायता देते है। शरीर में एसिडिटी को बेअसर करता है कद्दू बीज में कैल्शियम और मैग्नीशियम उपस्थित जो आपके शरीर में आई सूजन को समाप्त सकते है।
  6. तिल का बीज (Sesame seeds) : अपने बर्गर ब्रेड या अन्य मल्टीग्रेन ब्रेड पर कुछ बीज देखे होंगे आपकी जानकारी के लिए बता दे ये तिल के बीज होते है तिल बीज उत्कृष्ट फाइबर युक्त होते है इसमे विटामिन विशेष रूप से ई, मैग्नीशियम, जिंक और कैल्शियम उच्च मात्रा में होता है। इसमे मौजूद सभी खनिज शरीर के चयापचय को बनाए रखता है। इसमे शामिल फाइबर आपके पाचन तंत्र को बेहतर और मजबूत बनाने में आपकी मदद करता है साथ में इसको अपने भोजन में शामिल कर आप उसका स्वाद भी बदल सकते है। जोड़ों के दर्द के लिये एक चाय के चम्मच भर तिल बीजों को रातभर पानी के गिलास में भिगो दें। सुबह इसे पी लें या हर सुबह एक चम्मच तिल बीजों को आधा चम्मच सूखे अदरक के चूर्ण के साथ मिलाकर गर्म दूध के साथ पी लें इससे जोड़ों का दर्द जाता रहेगा। www.allayurvedic.org
  7. भांग का बीज (Hemp seed) : आमतौर पर भांग को नशे से जोड़कर देखा जाता है लेकिन इसका बीज सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। यह पूर्ण प्रोटीन पाने के कुछ शाकाहारी स्रोतों में से एक है क्योंकि इसमें सभी 20 अमीनो एसिड पाए जाते हैं। जो कैलोरी को जलाने वाली मांसपेशियों के विकास के लिए अहम हैं। कसरत के बाद भांग के कुछ बीजों का जूस या शेक के साथ सेवन किया जा सकता है भांग अर्थात गांजा का बीज मूड बदलने का विशिष्ट गुण होता है। मूड बदलने के अलावा भांग का बीज अतिरिक्त कैलोरी को जलाने में काफी मदद करता है। भांग के बीज में प्रोटीन ओमेगा -3 फैटी एसिड मैग्नीशियम और लोहे उपस्थित होते है। इन बीजों की मदद से शरीर में आई सूजन को भी नियंत्रित में किया जा सकता है।
  8. अनार के बीज (Pomegranate seeds) : अनार के कई फायदे हैं। अनार हृदय रोगों, तनाव और यौन जीवन के लिए बेहतर माना जाता है। अनार के रसदार बीजों में कैलोरी नहीं होती है। अनार के बीज एंटी ऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं। अनार में शामिल विटामिन सी चर्बी को कम करने में मदद करता है। अगर आप भी वजन कम करना चाहते हैं तो अनार के दाने आपकी इसमें मदद कर सकते हैं।

मोटी से मोटी तोंद को भी होना पड़ेगा फुटबॉल से गेंद, सिर्फ 1 ग्लास रात को पिए, फिर देखे कमाल

मोटी से मोटी तोंद को भी होना पड़ेगा फुटबॉल से गेंद, सिर्फ 1 ग्लास रात को पिए, फिर देखे कमाल




  • हम लोग अक्सर अपनी निकलती हुई तोंद (belly fat) से परेशान रहते हैं और उसे कम करने के लिए कई तरह के जतन करते हैं। लेकिन अब आपको बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आप इस आसान से बनने वाले जूस का सोने से पहले सेवन करके कर सकते हैं तोंद को गुड-बाय। चाहे मोटी से मोटी तोंद ही क्यों ना हो सिर्फ 1 ग्लास रात को पीने से वो हो जायेगी फुटबॉल से गेंद। www.allayurvedic.org
  • सोने से पहले खीरे के जूस का सेवन करें। खीरे का जूस पेट को साफ करता है। इसके साथ ही यह फैट भी नहीं बढ़ाता है। इसमें कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और और आपकी निकलती हुई तोंद को कंट्रोल (weight loss) करने में काफी लाभदायक होता है।
➡ खीरे के जूस 🍹 की सामग्री :
  1. – दो खीरे  🍆🍆
  2. – दो छोटे चम्मच नींबू का रस  🍋🍋
  3. – अदरक का एक छोटा टुकड़ा  🍗🍗
  4. – दो छोटे चम्मच चीनी  🍚
  5. – एक छोटा चम्मच- भुना जीरा पाउडर 🍜
  6. – तीन से चार पुदीना पत्ती 🌿
  7. – काला व सफेद नमक स्वादानुसार 🍚
➡ खीरे का जूस 🍹 बनाने की विधि :
  • खीरे को धोलें और छोटा छोटा काट कर छिलके सहित जूसर में डालें। अदरक और पुदीना भी जूसर में डाल दें और जूस निकाल लें। इसमें चीनी, नींबू का रस, भुना जीरा पाउडर, काला व सफेद नमक स्वादानुसार डालकर अच्छी तरह हिलाएं। फिर 1 ग्लास झट से गटक (पीना) जाए और इसका कमाल देखे, देखते ही देखते तोंद हो जायेगी फिट एंड फाइन।

Sunday, September 18, 2016

हप्पुसिंह

हप्पुसिंह – डाक्टर साब हमाओ इलाज कर देओडॉक्टर – तुम्हारा ये हाल कैसे हुआ?हप्पुजी– छत पे धरी थी 500 ईँटे, सब नेंचे ल्याने थी,ऐसे 5-10 करके ल्याते तो परेशान हो जाते ।सो हमने एक उपाय सोचो ।छत पे धरी हती एक टंकी,टंकी मे भर दई 500 ईँटे,फिर एक रस्सा बांद दओऔर कुन्दा मे फँसाकें रस्सा नेंचे लटका दओ ।हमने नेंचे जाके रस्सा पकडोसो टंकी नेंचे लटकगई ।अब टंकी 500 किलो कीऔर हम धरे 50 किलो केसो टंकी सरसरात नेंचे आ रई और हम सरसरात ऊपरजा रए।कुंदा से सर फूट गओटंकी जैसई नेंचे गिरीसो उको तल्ला खुल गओऔरसब ईँटे बाहर कड़ गई।अब टंकी बची 25 किलो कीऔर हम हते 50 किलो के,सो हम सरसरात नेंचे आ रएऔर टंकी सरसरात ऊपरजा रई।हम जैसई गिरे ईटो के ढेर पेसो हमाई करहाई टूट गई।औरहमाए हाथ से रस्सा छूट गओअब रस्सा सरसरात ऊपर जा रओऔर टंकी सरसरात नेंचेआ रईऔर गिरी हमाई मूड़ पे,सो हमाई खपड़िया फूटगई।बडी बिटम्मना हैअब तुमई अच्छो इलाज करो डाक्टर साब ।डॉक्टर साहब बेहोश..

मैं भारत का वोटर हूँ,

मैं भारत का वोटर हूँ, मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिये।

बिजली मैं बचाऊँगा नहीं, बिजली बिल मुझे कम चाहिये

पेड़ मैं लगाऊँगा नहीं, मौसम मुझको नम चाहिये

शिकायत मैं करूँगा नहीं, कार्रवाई तुरंत चाहिये।

लेन-देन मैं कम न करूँ, भ्रष्टाचार का अंत चाहिये।

पढ़ने को मेहनत करी नहीं, नौकरी लालीपाॅप चाहिये

काम करूँ न धेले भर का, वेतन लल्लनटाॅप चाहिये।

एक नेता कुछ बोल गया सो मुफ्त में पंद्रह लाख चाहिये

कमज़ोरों से लाभ उठायें फिर भी ऊँची साख चाहिये।

लोन मिले बिल्कुल सस्ता, बचत पर ब्याज चढ़ा चाहिये

नेता मेरी ही जात का हो,पर देश तो आगे बढ़ा चाहिये।।

मैं भारत का वोटर हूँ मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिये।

Saturday, April 23, 2016

नारी

देवी न बनाओ तुम मुझको
नारी ही बनी मुझे रहने दो
बस नारी का सम्मान दो
मुझे माँ की कोख में मत मारो
संसार में तो मुझे आने दो
बस नारी का सम्मान दो
बंदिशें अत्यधिक न लगाओ तुम
मेरा बचपन मुझे जी लेने दो
बस नारी का सम्मान दो
चूल्हा-चक्की में ही मत उलझाओ
कोलेज-स्कूल तो मुझे जाने दो
बस नारी का सम्मान दो
जबरन न किसी को थोपो मुझ पर
जीवन-साथी चुनने का मुझे हक तो दो
बस नारी का सम्मान दो
दहेज़ के लिए न प्रताड़ित करो
न ही तेल छिड़क के जलाओ मुझे
बस नारी का सम्मान दो
देनी ही है ग़र थोड़ी इज्ज़त
तो मुझे आर्थिक रूप से सशक्त करो
और स्वावलंबी बनने की प्रेरणा दो
ताकि कभी अनिष्ट कुछ होने पर
मैं पैरों पर अपने खड़ी हो सकूं
और आत्म-सम्मान से जी सकूं
देवी न बनाओ तुम मुझको
नारी ही बनी मुझे रहने दो
बस नारी का सम्मान दो...

Friday, January 8, 2016

हदीस

● शाब्दिक अर्थ : हदीस का शाब्दिक अर्थ है : बात, वाणी, बातचीत, गुफ़्तगू, ख़बर, क़िस्सा....।
● पारिभाषिक अर्थ : इस्लामी परिभाषा में ‘हदीस’, पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) के कथनों, कर्मों, कार्यों को कहते हैं। अर्थात् 40 वर्ष की उम्र में ईश्वर की ओर से सन्देष्टा, दूत (नबी, रसूल, पैग़म्बर) नियुक्त किए जाने के समय से, देहावसान तक, आप (सल्ल॰) ने जितनी बातें कीं, जितनी बातें दूसरों को बताईं, जो काम किए उन्हें हदीस कहा जाता है।
● परिचय : इस्लाम के मूल (ईश्वरीय) ग्रंथ क़ुरआन में अधिकतर विषयों पर जो रहनुमाई, आदेश-निर्देश, सिद्धांत, नियम, क़ानून, शिक्षाएँ, पिछली क़ौमों के वृत्तांत, रसूलों के आह्नान और सृष्टि व समाज से संबंधित बातों तथा एकेश्वरत्व के तर्क, अनेकेश्वरत्व के खंडन और परलोक-जीवन आदि की चर्चा हुई है वह संक्षेप में है। इन सब की विस्तृत व्याख्या का दायित्व ईश्वर ने पैग़म्बर (सल्ल॰) पर रखा।
पैग़म्बर (सल्ल॰) पर फ़रिश्ता जिबरील के माध्यम से अवतरित ‘वह्य’ (ईशप्रकाशना) क़ुरआन के रूप में थी। आप (सल्ल॰) पर दूसरे क़िस्म की वह्य भी अवरित होती थी, कभी हृदय में कोई बात डाल दी जाती, कभी स्वप्न में दिखा दी जाती, आदि। पैग़म्बर (सल्ल॰) के सारे काम इन दोनों प्रकार की वह्यों के अनुसार होते थे। यूँ पूरे पैग़म्बरीय जीवन-काल में आप (सल्ल॰) का संबंध हर समय, हर परिस्थिति में ईश्वर से स्थापित रहता था। आप (सल्ल॰) के हर काम, गतिविधि, बात और निर्णय को ईश्वर की स्वीकृति रहती थी। यही कारण है कि इस्लाम धर्म के मूल स्रोत क़ुरआन के बाद द्वितीय स्रोत ‘हदीस’ है। दोनों को मिलाकर इस्लाम धर्म की सम्पूर्ण व्याख्या होती है और इस्लामी शरीअत (जीवन-विधान) की संरचना होती है।
● हदीसों का प्रसार : इस्लाम का, हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के रसूल बनने के साथ उसके विशुद्ध रूप में जब पुनः आगमन हुआ उससे पहले के धर्म-ग्रथों में जो विकार आ गया था उसके कई कारणों में से एक यह भी था कि ईश-वाणी, रसूल के कथन और दूसरे इन्सानों व धर्माचार्यों, उपदेशकों, वाचकों, सुधारकों और धर्मविदों आदि के कथन भी आपस में मिल-जुल गए; ईशवाणी और मनुष्य-वाणी के मिश्रण में, मूल ईश-ग्रंथ कितना है, और इसके अंश कौन-कौन से हैं, यह जान सकना असंभव हो गया।
यह त्रुटि अन्तिम ईशग्रंथ ‘क़ुरआन’ में बिल्कुल ही न आने पाए (क्योंकि आगे सदा के लिए इसी ग्रंथ से मानव-जाति का मार्गदर्शन होना था तथा इसे हर प्रकार के विकार से सुरक्षित रखकर इस्लाम को शाश्वत रूप से मानवजाति का शुद्ध व विश्वसनीय धरोहर बनाया जाना था) इसलिए सामान्यतः आप (सल्ल॰) के कथनों को लिखित रूप में न लाया गया। आप (सल्ल॰) के आम साथी, और ऐसे साथी जो अधिकतर समय आपके प्रेम व श्रद्धा में तथा आप (सल्ल॰) से धर्म की बातें सुनने-सीखने के लिए आप (सल्ल॰) के समीप, या साथ रहते थे, आप (सल्ल॰) के कथनों (हदीसों) को, जो भी मिलता उससे बयान करते। आपके कर्मों और गतिविधियों को भी जगह-जगह बयान करते रहते। इस तरह आरंभ काल से लगभग दो शताब्दी तक यह क्रम चलता रहा और पीढ़ी-दर-पीढ़ी, हदीसों का मौखिक प्रसार होता रहा। जो भी व्यक्ति हदीस बयान करता वह यह बात भी अवश्यतः बताता कि उसने वह बात सीधे हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) से सुनी या वह काम आप (सल्ल॰) को करते देखा है; या अमुक व्यक्ति से सुना है। इस तरह हदीस की विश्वसनीयता-हेतु हर हदीस के साथ उसे बयान करने वाले व्यक्ति, या आगे के सिलसिले में उसे बयान करने वाले व्यक्तियों के नामों (उनके पिता के नामों सहित) का बयान व प्रसार होता रहा (आगे चलकर इसी प्रसार-पद्धति से लाभ उठाकर हदीसों को लिखने, उनका संकलन व संग्रह करने का काम किया गया)। अरबों के बारे में सारे (मुस्लिम व ग़ैर-मुस्लिम) विद्वान, शोधकर्ता व इतिहासकार सहमत हैं कि उनकी स्मरण-शक्ति असामान्य रूप से अधिक तथा स्मरण-क्षमता बहुत ही तेज़ थी। वे अपनी लंबी-लंबी वंशावली भी याद रखने में निपुण होते थे।
हदीसें बयान करने वाले व्यक्तियों की संख्या हज़ारों में है। इन में पुरुष भी हैं और स्त्रियाँ भी; स्त्रिायों में विशेषतः पैग़म्बर (सल्ल॰) की पत्नियाँ। हदीस उल्लिखित करने वालों की श्रृंखलाओं में लगभग एक लाख लोगों के नाम आए हैं। यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि चूँकि क़ुरआन (मूल ईशग्रंथ) के आदेशों, शिक्षाओं और नियमों की विस्तारपूर्ण व्याख्या ‘हदीस’ द्वारा ही होती थी इसीलिए हदीसों की शुद्धता को यक़ीनी बनाने का विषय अत्यंत नाज़ुक व संवेदनशील था। अतः (हदीस-संग्रह ‘बुख़ारी’ में, पैग़म्बर (सल्ल॰) के साथी हज़रत अबू सलमा (रज़ि॰) की बयान की गई) हदीस के मुताबिक़, आप (सल्ल॰) ने हदीस-वर्णनकर्ताओं को सख़्त चेतावनी दी थी कि ‘‘जो व्यक्ति मुझ से संबंध लगाकर वह बात कहे जो मैंने नहीं कही, वह अपना ठिकाना जहन्नम (नरक) में बनाले।’’
● हदीस-लेखन : हदीस-लेखन का, उपरोक्त संसाधन पर आधारित विशाल व महान कार्य, विधिवत रूप से यद्यपि, लगभग 200 वर्ष बाद आरंभ हुआ, फिर भी पैग़म्बरीय जीवन के 13 वर्षीय मक्का-काल के बाद, आप (सल्ल॰) के मदीना प्रस्थान (हिजरत) के 10 वर्षीय काल में, आप (सल्ल॰) के आदेश व अनुमति से तथा इस सावधानी के साथ कि आप (सल्ल॰) का कथन, क़ुरआन की आयतों से, स्पष्ट व निश्चित रूप से अलग रहना चाहिए और किसी भी बात के ‘ईशवाणी’ या ‘ईशदूतवाणी’ होने में किसी भ्रम, दुविधा, ग़लतफ़हमी की तनिक भी संभावना, गुंजाइश न रहे; कुछ हदीसें लिखी भी गईं। वैसे भी, क़ुरआन की भाषा-शैली और हदीस की भाषा-शैली में स्पष्ट अन्तर भी आसानी से विदित हो जाता है।
इसके अलावा, स्वयं पैग़म्बर (सल्ल॰) ने, कुछ विशेष अवसरों पर कुछ आवश्यक बातें लिखवाई थीं, जो आगे चलकर हदीसों का भाग बनीं। आप ने अपने जीवन के अन्तिम चरण में, इस्लामी शासन के कार्यकर्ताओं के पास भेजने के लिए ‘किताबुस्सदक़ा’ लिखवाई थी। इसमें ‘मवेशियों की ज़कात’ से संबंधित आदेश थे। इसी तरह आप (सल्ल॰) ने इस्लामी प्रशासन के अधिकारियों, कार्यकर्ताओं को फ़ौजदारी व दीवानी के क़ानून और मीरास (Inheritance) व ज़कात के आदेश भी, लिखवा कर विभिन्न इलाक़ों में भिजवाए। इसके अलावा आपके लिखवाए हुए पत्र, सन्धि-पत्र, जागीरों के अधिकार-पत्र आदि विभिन्न क़ौमों, क़बीलों के सरदारों के पास भेजे गये। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आप (सल्ल॰) ने कई देशों के शासकों को सत्य-धर्म स्वीकार करने का आह्नान देते हुए, एक पैग़म्बर और (इस्लामी राज्य के) शासक की हैसियत से पत्रा भेजे। ऐसे सभी पत्रों पर आप (सल्ल॰) की सरकारी मुहर लगी होती थी। ऐसे पत्रों की संख्या रिकार्ड पर है, इन में से कुछ की फोटो-प्रतिलिपियाँ भी मौजूद हैं। ये सब लिपिबद्ध हदीस का हिस्सा हैं।
● हदीस-संग्रह : हदीस के निम्नलिखित छः विश्वसनीय संग्रह हैं जिनमें 29,578 हदीसें संग्रहित हैं :
1. सहीह बुख़ारी :  संग्रहकर्ता—अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद-बिन-इस्माईल बुख़ारी, हदीसों की संख्या—7225
2. सहीह मुस्लिम : संग्रहकर्ता—अबुल-हुसैन मुस्लिम-बिन-अल-हज्जाज, हदीसों की संख्या—4000
3. सुनन तिर्मिज़ी : संग्रहकर्ता—अबू-ईसा मुहम्मद-बिन-ईसा तिर्मिज़ी, हदीसों की संख्या—3891
4. सुनन अबू-दाऊद : संग्रहकर्ता—अबू-दाऊद सुलैमान-बिन-अशअ़स सजिस्तानी, हदीसों की संख्या—4800
5. सुनन इब्ने माजह : संग्रहकर्ता—मुहम्मद-बिन-यज़ीद-बिन-माजह, हदीसों की संख्या—4000
6. सुनन नसाई : संग्रहकर्ता—अबू-अब्दुर्रहमान-बिन-शुऐब ख़ुरासानी, हदीसों की संख्या—5662
● उपरोक्त संग्रहों से संकलित अन्य प्रमुख उपसंग्रह :
1. मिश्कात : संग्रहकर्ता—मुहम्मद-बिन-अब्दुल्लाह अल-ख़तीब तबरेज़ी, हदीसों की संख्या—1894
2. रियाज़-उस्-सालिहीन: संग्रहकर्ता—अबू-ज़करीया-बिन-शरफ़ुद्दीन नबवी, हदीसों की संख्या—6294
● हदीस की, धर्मशास्त्र (शरीअत) में भूमिका: इस्लामी धर्मशास्त्र ‘क़ुरआन’ और ‘हदीस’ पर आधारित है। कुछ आधारभूत नियम क़ुरआन की आयतों से बने हैं। जिन नियमों की व्याख्या की आवश्यकता हुई, वह व्याख्या हदीस से ली गई है। बदलते हुए ज़मानों और नई-नई परिस्थितियों में जो नए-नए इशूज़ नई-नई समस्याएं सामने आती है उनसे संबंधित, शरीअत के क़ानून सिर्फ़ क़ुरआन और हदीस के अनुसार ही बनाए जाते हैं। यही कारण है कि किसी इन्सान को, चाहे वह मुसलमान ही हो और सारे मुसलमान मिल जाएँ, किसी को भी क़ुरआन और हदीस से निस्पृह व स्वच्छंद होकर शरीअत का कोई क़ानून बनाने का अधिकार प्राप्त नहीं है। क़ानून में संशोधन-परिवर्तन, जो क़ुरआन, हदीस की परिधि से बाहर जाकर किया जाए, असंभव और अमान्य होता है।
● हदीस साहित्य: हदीसों के संग्रह सामान्यतया विषयों के आधार पर अध्यायीकरण करके संकलित किए गए हैं, ये विषय जीवन के हर पहलू, हर क्षेत्र पर आधारित हैं। इन संग्रहों के बाद बहुत ही बड़े पैमाने पर इन (में उल्लिखित) हदीसों की व्याख्या पर व्यापक साहित्य तैयार किया गया है। फिर, विभिन्न विषयों को समाहित करने वाली पुस्तकें तैयार की गई है। इस प्रकार एक विशाल हदीस-साहित्य तैयार हो चुका है। ये संग्रह व साहित्य इस्लामी विद्यालयों के पाठ्यक्रम का अनिवार्य अंश होते हैं। गोष्ठियों, बैठकों, सभाओं में पूरे विश्व में हदीस पाठ (दर्स-ए-हदीस) के प्रयोजन किए जाते हैं। इस तरह हदीस का ज्ञान और उसकी शिक्षाएँ मुस्लिम समाज में निरन्तर प्रवाहित होती रहती हैं।

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वार्न डूर्न

क्या ये संभव है कि जीवन भर आप जिस विचारधारा का विरोध करते आए हों एक मोड़ पर आकर आप उसके अनुनायी बन जाएं??

कुछ ऐसा ही हुआ है नीदरलैंड में.

लंबे समय तक इस्लाम की आलोचना करने वाले डच राजनेता अनार्ड वॉन डूर्न ने अब इस्लाम धर्म कबूल लिया है.

अनार्ड वॉन डूर्न नीदरलैंड की घोर दक्षिणपंथी पार्टी पीवीवी यानि फ्रीडम पार्टी के महत्वपूर्ण सदस्य रह चुके हैं. यह वही पार्टी है जो अपने इस्लाम विरोधी सोच और इसके कुख्यात नेता गिर्टी वाइल्डर्स के लिए जानी जाती रही है.

मगर वो पांच साल पहले की बात थी. इसी साल यानी कि 2013 के मार्च में क्लिक करें अर्नाड डूर्न ने इस्लाम धर्म क़बूल करने की घोषणा की.

नीदरलैंड के सांसद गिर्टी वाइल्डर्स ने 2008 में एक इस्लाम विरोधी फ़िल्म 'फ़ितना' बनाई थी. इसके विरोध में पूरे विश्व में तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं थीं.

"मैं पश्चिमी यूरोप और नीदरलैंड के और लोगों की तरह ही इस्लाम विरोधी सोच रखता था. जैसे कि मैं ये सोचता था कि इस्लाम बेहद असहिष्णु है, महिलाओं के साथ ज्यादती करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देता है. पूरी दुनिया में इस्लाम के ख़िलाफ़ इस तरह के पूर्वाग्रह प्रचलित हैं."

अनार्ड डूर्न जब पीवीवी में शामिल हुए तब पीवीवी एकदम नई पार्टी थी. मुख्यधारा से अलग-थलग थी. इसे खड़ा करना एक चुनौती थी. इस दल की अपार संभावनाओं को देखते हुए अनार्ड ने इसमें शामिल होने का फ़ैसला लिया.

पहले इस्लाम विरोधी थे-
अनार्ड, पार्टी के मुसलमानों से जुड़े विवादास्पद विचारों के बारे में जाने जाते थे. तब वे भी इस्लाम विरोधी थे.

वे कहते हैं, "उस समय पश्चिमी यूरोप और नीदरलैंड के बहुत सारे लोगों की तरह ही मेरी सोच भी इस्लाम विरोधी थी. जैसे कि मैं ये सोचता था कि इस्लाम बेहद असहिष्णु है, महिलाओं के साथ ज्यादती करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देता है. पूरी दुनिया में इस्लाम के ख़िलाफ़ इस तरह के पूर्वाग्रह प्रचलित हैं."

साल 2008 में जो इस्लाम विरोधी फ़िल्म 'फ़ितना' बनी थी तब अनार्ड ने उसके प्रचार प्रसार में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था. इस फ़िल्म से मुसलमानों की भावनाओं को काफ़ी ठेस पहुंची थी.

वे बताते हैं, "'फ़ितना' पीवीवी ने बनाई थी. मैं तब पीवीवी का सदस्य था. मगर मैं 'फ़ितना' के निर्माण में कहीं से शामिल नहीं था. हां, इसके वितरण और प्रोमोशन की हिस्सा ज़रूर था."

अनार्ड को कहीं से भी इस बात का अंदेशा नहीं हुआ कि ये फ़िल्म लोगों में किसी तरह की नाराज़गी, आक्रोश या तकलीफ़ पैदा करने वाली है.

वे आगे कहते हैं, "अब महसूस होता है कि अनुभव और जानकारी की कमी के कारण मेरे विचार ऐसे थे. आज इसके लिए मैं वाक़ई शर्मिंदा हूं."

सोच कैसे बदली?

अनार्ड ने बताया, "जब फ़िल्म क्लिक करें बाज़ार में आई तो इसके ख़िलाफ़ बेहद नकारात्मक प्रतिक्रिया हुई. आज मुझे बेहद अफ़सोस हो रहा है कि मैं उस फ़िल्म की मार्केटिंग में शामिल था."

इस्लाम के बारे में अनार्ड के विचार आख़िर कैसे बदलने शुरू हुए?

वे बताते हैं, "ये सब बेहद आहिस्ता-आहिस्ता हुआ. पीवीवी यानि फ़्रीडम पार्टी में रहते हुए आख़िरी कुछ महीनों में मेरे भीतर कुछ शंकाएं उभरने लगी थीं. पीवीवी के विचार इस्लाम के बारे में काफ़ी कट्टर थें, जो भी बातें वे कहते थे वे क़ुरान या किसी किताब से ली गई होती थीं."

इसके बाद दो साल पहले अनार्ड ने पार्टी में अपनी इन आशंकाओं पर सबसे बात भी करनी चाही. पर किसी ने ध्यान नहीं दिया.

तब उन्होंने क़ुरान पढ़ना शुरू किया. यही नहीं, मुसलमानों की परंपरा और संस्कृति के बारे में भी जानकारियां जुटाने लगें.

मस्जिद पहुंचे

अनार्ड वॉन डूर्न इस्लाम विरोध से इस्लाम क़बूल करने तक के सफ़र के बारे में कहते हैं, "मैं अपने एक सहयोगी से इस्लाम और क़ुरान के बारे में हमेशा पूछा करता था. वे बहुत कुछ जानते थे, मगर सब कुछ नहीं. इसलिए उन्होंने मुझे मस्जिद जाकर ईमाम से बात करने की सलाह दी."

उन्होंने बताया, "पीवीवी पार्टी की पृष्ठभूमि से होने के कारण मैं वहां जाने से डर रहा था. फिर भी गया. हम वहां आधा घंटे के लिए गए थे, मगर चार-पांच घंटे बात करते रहे."

अनार्ड ने इस्लाम के बारे में अपने ज़ेहन में जो तस्वीर खींच रखी थी, मस्जिद जाने और वहां इमाम से बात करने के बाद उन्हें जो पता चला वो उस तस्वीर से अलहदा था.

वे जब ईमाम से मिले तो उनके दोस्ताने रवैये से बेहद चकित रह गए. उनका व्यवहार खुला था. यह उनके लिए बेहद अहम पड़ाव साबित हुआ. इस मुलाक़ात ने उन्हें इस्लाम को और जानने के लिए प्रोत्साहित किया.

वॉन डूर्न के मस्जिद जाने और इस्लाम के बारे में जानने की बात फ़्रीडम पार्टी के उनके सहयोगियों को पसंद नहीं आई. वे चाहते थे कि वे वही सोचें और जानें जो पार्टी सोचती और बताती है.

अंततः इस्लाम क़बूल लिया

मगर इस्लाम के बारे में जानना एक बात है और इस्लाम धर्म क़बूल कर लेना दूसरी बात.

पहले पहले अर्नाड के दिमाग़ में इस्लाम धर्म क़बूल करने की बात नहीं थी. उनका बस एक ही उद्देश्य था, इस्लाम के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना. साथ ही वे ये भी जानना चाहते थे कि जिन पूर्वाग्रहों के बारे में लोग बात करते हैं, वह सही है या यूं ही उड़ाई हुई.

इन सबमें उन्हें साल-डेढ़ साल लग गए. अंत में वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इस्लाम की जड़ें दोस्ताना और सूझ बूझ से भरी हैं.

इस्लाम के बारे में ख़ूब पढने, बातें करने और जानकारियां मिलने के बाद अंततः उन्होंने अपना धर्म बदल लिया.

अनार्ड के इस्लाम क़बूलने के बाद बेहद मुश्किलों से गुज़रना पड़ा. वे कहते हैं, "मुझपर फ़ैसला बदलने के लिए काफ़ी दबाव डाले गए. अब मुझे ये समझ में आ रहा था कि मेरे देश नीदरलैंड में लोगों के विचार और सूचनाएं कितनी ग़लत हैं."

परिवार और दोस्तों को झटका

परिवार वाले और दोस्त मेरे फ़ैसले से अचंभित रह गए. मेरे इस सफ़र के बारे में केवल मां और गर्लफ्रेंड को पता था. दूसरों को इसकी कोई जानकारी नहीं थे. इसलिए उन्हें अनार्ड के मुसलमान बन जाने से झटका लगा.

कुछ लोगों को ये पब्लिसिटी स्टंट लगा, तो कुछ को मज़ाक़. अनार्ड कहते हैं कि अगर ये पब्लिसिटी स्टंट होता तो दो-तीन महीने में ख़त्म हो गया होता.

वे कहते हैं, "मैं बेहद धनी और भौतिकवादी सोच वाले परिवार से हूं. मुझे हमेशा अपने भीतर एक ख़ालीपन महसूस होता था. मुस्लिम युवक के रूप में अब मैं ख़ुद को एक संपूर्ण इंसान महसूस करने लगा हूं. वो ख़ालीपन भर गया है." (बीबीसी से बातचीत पर आधारित)

http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/11/131111_dutch_politician_islam_sk.shtml

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