गोवा
गोवा की सैर
सुन्दर सुन्दर पर्यटक स्थलों की सैर करने
का मज़ा ही कुछ और हैं और यदि बात
गोवा की हो तो बस मन करता है की काश
वो शाम का वो वीच के किनारे
वाला नजारा कभी खत्म ही न हो। परन्तु
ये नज़ारा और भी आर्कषक हो जाता है तब
तो लगता है जब वर्षा ऋतु
की सौंधी खुशबू के साथ
प्रकृति गोवा को कुछ ऐसा ही अलग और अदभुत
स्वरूप प्रदान करती है। गोवा एक छोटा-सा राज्य है।
पणजी गोवा की राजधानी है।
यह स्थान शांतिप्रिय पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को बहुत
भाता है। यहां छोटे-बड़े लगभग 40 समुद्री तट है।
इनमें से कुछ समुद्र तट अंर्तराष्ट्रीय स्तर के हैं।
इसी कारण गोवा की विश्व पर्यटन मानचित्र
के पटल पर अपनी एक अलग पहचान है। सुहावने
मौसम और यहां स्थित समुद्री तटों के कायल
पर्यटकों की भीड़ सबसे अधिक गर्मियों के
महीनें में ही रहती है।
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बच्चों की छुट्टी औऱ काम के थकान से
पर्यटक यहां गर्मियों की छुट्टियों में आते हैं। कुछ
पर्यटक ऐसे भी हैं जो यहां सिर्फ मानसून
का मज़ा लेने यहां आते हैं। गोवा में पर्यटक मानसून
की बौछारों के बीच मस्त माहौल का आनंद
बटोरने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और शायद इसलिए
गोवा भी मानसून प्रेमी और
सैलानियों का स्वागत बाहें पसारे रहता है। एक के एक बाद लगातार
लंबी कतार से सागर तटों की बहार
भी पर्यटकों को अपनी ओर खचने में कोई
कसर नही छोड़ती। गोवा के मनभावन
बीच की लंबी कतार में
पणजी से 16 किलोमीटर दूर कलंगुट
बीच, उसके पास बागा बीच,
पणजी बीच के निकट मीरामार
बीच, जुआरी नदी के मुहाने
पर दोनापाउला बीच स्थित है।
वहीं इसकी दूसरी दिशा में
कोलवा बीच ऐसे ही सागरतटों में से है
जहां मानसून के वक्त पर्यटक विशेष तौर पर आते है।
यही नहीं, अगर मौसम साथ दे तो बागाटोर
बीच, अंजुना बीच, सिंकेरियन
बीच, पालोलेम बीच जैसे अन्य सुंदर सागर
तट का नज़रा नही भी छोडा जाता।
गोवा की सुन्दरता केवल यहां के सागर तटों तक
ही सीमित नहीं है। यहां सेंट
फ्रांसिस, ऑफ असीसी,
होली स्पिरिट, पिलर सेमिनरी,
सालीगांव, रकोल सेमिनरी आदि यहां के
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक चर्च है। इसके अतिरिक्त सेंट काजरन
चर्च, सेंट आगस्टीन टावर, ननरी ऑफ
सेंट मोनिका तथा सेंट एरक्स चर्च भी प्रसिद्ध है।
गोवा के पवित्र मंदिर जिनसे श्री कामाक्षी,
सप्तकेटेश्वर, श्री शांतादुर्ग,
महालसा नारायणी, परनेम का भगवती मंदिर
और महालक्ष्मी आदि दर्शनीय है।
जो पर्यटकों को अपनी ओर बुलता है और पर्यटक
खिचतें चलें जाते हैं।
चर्च और मंदिर देखने निकलें तो सामना भव्य लैंडस्केप्स से
भी होगा। जब भी आकाश साफ
हो या हल्की बौछारों का मौसम हो तो निकल जाए। पूरे
रास्ते भीगा नैसर्गिक सौंदर्य आपको अनोखा सुकून
प्रदान करेगा। काली सड़कों के आसपास लाल
मिट्टी के मैदान या टीले, यहां वहां दिखते
नारियल के ऊंचे दरख्त या धान के खेत प्राकृतिक दृश्यों में मोहक
रंग भर देते हैं। आसपास फैली हरियाली में
हरे रंग के हल्की गहरी अनेक रोड नजर
आती है। लॉन्ग ड्राइव के शौकीन
गोवा की सड़कों पर लॉन्ग ड्राइव का आनन्द
भी ले सकते है। मडगांव से 60 कि.मी.
दूर दूधसागर फॉल्स भी मानसून में अपने चरम पर
होता है।
चर्चों के इतिहास में यह कहां जाता है कि करीब 450
वर्ष के पुर्तगाली उपनिवेश काल में यहां अनेक भव्य
चर्च बनाए गए थे, जिनके कारण आज गोवा को भारत का रोम
भी कहा जाता है। पणजी के आधुनिक
बाजार भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
मांडवी नदी के तट पर बसे इस शहर में
शाम के समय सैलानी रिवर क्रूज का आनन्द लेने
पहुंचते हैं। मांडवी पर तैरते क्रूज पर
संगीत एवं नृत्य के कार्यक्रम में
गोवा की संस्कृति की एक झलक देखने
को मिलती है। नदी के दूसरे तट पर
मछुआरों की रंगबिरंगी मोटर बोट कतार में
खड़ी एक अलग दृश्य बनाती है।
पणजी के आसपास और ओल्ड गोवा के लैटिन
शैली के पुराने घर भी, आज पर्यटकों के
आकर्षण का केंद्र बन गए हैं।
शिखा जोशी
Thursday, January 22, 2015
गोवा की सैर
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