Wednesday, January 23, 2019

केंसर

*( कैंसर - बीमारी नहीं बिजनेस )*

*☝जानें चौंकाने वाला सच कैंसर के बारे में :- एक बार अवश्य पूरा पढे **⬇****  और पॉस्ट करे...                          *✍मांगीलाल .ओसवाल. Chandan*

भले ही आपको इस बात पर यकीन न हो रहा हो...

लेकिन,
यह पूरी जानकारी पढ़ने के बाद -

आप भी यही कहेंगे कि -

*कैंसर कोई बीमारी नहीं...*
*बल्कि,*
*चिकित्सा जगत में पैसा कमाने का साधन मात्र है।*
पिछले कुछ सालों में -
कैंसर को एक तेजी से बढ़ती बीमारी के रूप में प्रचारित किया गया।

जिसके -ईलाज के लिए -
कीमोथैरेपी, सर्जरी या और उपायों को अपनाया जाता है,
जो महंगे होने के साथ-साथ...

मरीज के लिए उतने ही खतरनाक भी होते हैं।

*लेकिन,*
*अगर हम कहें कि -*
*कैंसर जैसी कोई बीमारी है ही नहीं तो ?*

जी हां...

*यह बात बिल्कुल सच है कि -*
*कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को स्वास्थ्य जगत में -*
*कैंसर का नाम दिया गया है...*
*और,*
*इससे अच्छी खासी कमाई भी की जाती है।*

लेकिन,
इस विषय पर लिखी गई एक किताब -

*वर्ल्ड विदाउट कैंसर*

जो कि कैंसर से बचाव के हर पहलू को इंगित करती है...
और,
अब तक विश्व की कई भाषाओं में ट्रांसलेट की जा चुकी है !

*इस किताब का दावा है कि -*
*कैंसर कोई बीमारी नहीं...*
*बल्कि,*
शरीर में विटामिन *बी17* की कमी होना है।

*आपको यह बात जरूर जान लेना चाहिए कि -*
*कैंसर नाम की कोई बीमारी है ही नहीं...*

*बल्कि,*
*यह शरीर में विटामिन बी17 की कमी से ज्यादा कुछ भी नहीं है।*

*इस कमी को ही कैंसर का नाम देकर...*
*चिकित्सा के क्षेत्र में एक व्यवसाय के रूप में स्थापित कर लिया गया है।*
*जिसका फायदा मरीज को कम...*
*और,*
*चिकित्सकों को अधिक होता है।*

*चूंकि,*
*कैंसर मात्र शरीर में किसी विटामिन की कमी है...*
*तो -*
*इसकी पूर्ति करके इसे कम किया जा सकता है...*
*और,*
*इससे बचा जा सकता है।*

यह उसी तरह का मसला है -
जैसे सालों पहले 'स्कर्वी' रोग से कई लोगों की मौते होती थी...

लेकिन,
बाद में खोज में यह सामने आया कि -
यह कोई रोग नहीं...
बल्कि,
विटामिन सी की कमी या अपर्याप्तता थी।

*कैंसर को लेकर भी कुछ ऐसा ही है।*

*विटामिन बी 17 की कमी को कैंसर का नाम दिया गया है..*
*लेकिन,*
*इससे डरने या मानसिक संतुलन खोने की जरूरत नहीं है।*
बल्कि,
आपको इसकी स्थिति को समझना होगा...
और,
*उसके अनुसार -*
इसके वैकल्पिक उपायों को अपनाना होगा।

इस कमी को पूरा करने के लिए-
*फ्रूट स्टोन, खूबानी, सेब, पीच, नाशपाती, फलियां, अंकुरित दाल व अनाज, मसूर के साथ ही बादाम विटामिन बी 17 का बेहतरीन स्त्रोत है।*

इनके अलावा -
*स्ट्रॉबेरी, ब्लू बेरी, ब्लैक बेरी, कपास व अलसी के बीच, जौ का दलिया, ओट्स, ब्राउन राइस, धान, कद्दू, ज्वार, अंकुरित गेहूं, ज्वारे, कुट्टू, जई, बाजरा, काजू, चिकनाई वाले सूखे मेवे आदि विटामिन बी17 के अच्छे स्त्रोत हैं।*

इन्हें अपनी रोज की डाइट में शामिल करके...

*आप कैंसर से यानि इस विटामिन की कमी से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं।*

Wednesday, January 2, 2019

कादर खान

*किसी सहरा में महकता, गुलिस्ताँ न हो जाऊँ*

*हर ऐब सुधार लूँ तो, फ़रिश्ता न हो जाऊँ!*

*कादर खान - पुकार से ललकार तक*

*फरहान खान*

मेरा सफर बड़ा लंबा है, मेरी पैदाईश से पहले 1937 में मुझसे पहले मेरे चंद भाई थे एक था शम्सुर्रहमान वो पैदा हुआ आठ साल का हुआ और मर गया, उसके बाद हबीबुर्रहमान वो पैदा हुआ, आठ साल की उम्र को पहुंचा और मर गया, तीसरा फजलुर्रहमा, ये सब रहमान थे क्योंकि मेरे पिता जी का नाम अब्दुर्रहमान था, मुझसे पहले मेरे चार भाई इस दुनिया से जा चुके थे, फिर 1942 में मैं पैदा हुआ 22 अक्टूबर 1942 यह तारीख भी मुझे नहीं मालूम थी क्योंकि मैं काबुल में था वहां पैदा हुआ कुछ याद नहीं, वहां जाहिलों की बस्ती है, गरीबों का इलाका है, पहाड़ियों का इलाका है, कोई नहीं जानता कि क्या तारीख होगी क्या दिन होगा, मैंने सोहराब मोदी से पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि उनकी फिल्म 22 अक्टूबर 1942 को रिलीज हुई थी, तो इस तरीके से मुझे पता चला कि मैं पुकार से इस दुनिया की ललकार में आया हूं, मैं उनका फैन हो गया कि उन्होंने मुझे मेरा पैदाईश का दिन बताया। जब मैं पैदा हुआ अम्मी को लगा कि काबुल (अफगानिस्तान) कि यहां आबो हवा उनके बच्चों के लिये ठीक नहीं है, अम्मी ने कहा कि यहां से इसे ले चलो, अब मेरे वालिद गरीब आदमी मुझ छोटी सी लाश को लेकर अफगानिस्तान से बंबई पहुंचे। बंबई का सबसे बड़ा और गंदा इलाका है कमाठीपुरा मुझे लगता है कि दुनिया में इससे बड़ी बुरी जगह और कहीं नहीं होगी जहां इतनी बुराईयां हों, तरह तरह के लोग थे, एक से बढ़कर एक गंदे लोग, जुहारी, शराबी, कबाबी, चर्सी, गंजेड़ी, नशेड़ी, यहां हर वो बुराई होती है जो दुनिया की बुराई है। मेरे वालिद अबदुर्रहमान मुंबई को सह नहीं पाये, हर रोज घर में झगड़ा होता, फिर एक दिन अम्मी का तलाक हो गया, उस वक्त मेरी उम्र सिर्फ एक साल थी, यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सदमा था कि एक महज एक साल की उम्र में ही मेरे वालिद और अम्मी का तलाक हो गया था, फिर मेरे नाना आये, उन्होंने अम्मी को समझाया कि मुंबई जैसे शहर में एक पठान औरत, एक खूबसूरत औरत, एक काबुली शेरनी, एक नौजवान औरत का अकेला रहना ठीक नहीं है, इसलिये उन्हें शादी कर लेनी चाहिये, फिर अम्मी की शादी की गई। मेरे सौतेले वालिद कार्पेंटर थे, लेकिन काम नहीं करते थे, आपने देखा होगा कि हमारे यहां जो मिस्त्री होते हैं, मैकेनिक होते हैं, पिलंबर होते हैं ये काम नहीं करते इनसे बात करो तो नजरें मिलाकर बात नहीं करते थे, मैंने एक डॉयलाग लिखा है कि जिनमें नजरें मिलाने की ताकत नहीं होती वे आपको गले लगा लेते हैं, या पैर छू लेते हैं। मेरे वालिद खड़क (मुंबई) में एक मस्जिद थी वहां जाकर इमामत करने लगे, लोगों को नमाज पढ़ाने लगे, और मैं तनो तन्हा जिंदगी की मुसीबत में चलता रहा, स्कूल गया, पांचवी छठी तक तो चल गया, मगर घर में दूसरे तीसरे दिन फाका होता था घर में, जिंदगी में भूख क्या होती है ? सहा है मैंने, दुःख क्या होता है ? वो सहा है मैंने.... खैर .. जब भी कभी घर में फाका होता था खाने को नहीं होता था, तो मेरे सोतेले वालिद मुझसे कहते थे कि जा अपने बाप के पास और उससे कहना कि दो रुपया दे ? मैं जाता था,... छोटा सा बच्चा रोजाना जाकर अपने बाप से दो रुपया मांग कर लाता था, पंद्रह रुपया उनकी तन्खवाह थी कितना देते वो ? खैर उनसे पैसे लेकर आता फिर आठ आने का चावल, आठ आने की दाल, एक रुपये का आटा, लेकर आता, फिर अम्मी खाना बनाती, और हम खाते। यह जिंदगी यूं ही गुजरी है सर ? इस जिंदगी ने ऐश नही कराया, जब खाने का वक्त था तब रोटी नहीं मिली... और जब रोटी आई तब भूख मर गई।

*मैं लब ए शिकवा को सी लेता हूं*
*चंद घड़ियां हैं यूं ही जी लेता हूं*

(साल 2015 मे लिखी बायोग्राफी  जो मुस्लिम टूडे ने प्रकाशित किया था। उसी से कादर खान की ज़िंदगी की कुछ छलकिया)

*फ़रहान खान भोपाल*