यह देखकर जनाजे के फूल भी हैरान हो गए..
कि अब शहीद भी हिन्दू और मुसलमान हो गए..
लहू जो बिखरता है अपने देश की सरहदों पर,
उसके रंग भी राम और रहमान हो गये..!!
सियासत की चालों को कोई समझ न पाया,
खद्दर की खोल में सब शैतान हो गये...
शहरे दिलों में जहां कभी जश्न रहता था,
वहां हरे और केसरिया मकान हो गये..!!
बर्फ में, रेगिस्तानों में, संमुदर में, तूफानों में,
चौकस जवानों के रहबर अब बेईमान हो गये..
मजहबी बवाल का जहर घोल रहे मुल्क की फिजा में,
कुछ अमित शाह और कुछ आजम खान हो गये..!!